
लखनऊ डेस्क : राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कथित गड़बड़ी और पारदर्शिता के मुद्दे को लेकर 11 सवाल उठाए हैं। साथ ही पूछा है कि आखिर इस पूरे मामले का सरगना कौन है और उसे बचाने की कोशिश कौन कर रहा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि मामले को लेकर लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि कथित हेराफेरी में शामिल लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें विभिन्न समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आईं, लेकिन बाद में उनका खंडन किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती और बाद में किसी दबाव में आकर बयान बदल दिए जाते हैं। अखिलेश ने कहा कि इस पूरे प्रकरण ने देश और दुनिया के सनातन समाज के बीच कई तरह की आशंकाओं को जन्म दिया है।
अखिलेश ने उठाए 11 बड़े सवाल
सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में 11 सवालों के जरिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने की मांग की। उन्होंने पूछा कि आखिर देश की धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करने वालों के पीछे कौन है और चढ़ावे में कथित चोरी करने वालों को संरक्षण कौन दे रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस कथित गड़बड़ी के तार किन लोगों तक जुड़े हैं, पूरे मामले की कमान किसके हाथ में है और घोटाले का मुख्य सूत्रधार कहां है। साथ ही उन्होंने यह जानने की मांग की कि कथित घोटाले में किस-किस की हिस्सेदारी है और क्या इसके पीछे धन के बंटवारे को लेकर विवाद या प्रभावशाली लोगों के बीच प्रतिस्पर्धा वजह बनी है।
अखिलेश ने चढ़ावे की रकम की गणना में निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि ट्रस्ट तथा सरकारी बैंक के बीच इस व्यवस्था को लागू करने के पीछे क्या उद्देश्य था। उन्होंने मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की भी मांग की।
इसके अलावा उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ पर तंज कसते हुए पूछा कि इस मामले में उसकी भूमिका और जिम्मेदारी क्या है।
भाजपा नेता ने की केंद्रीय जांच की मांग
वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता और पार्टी प्रवक्ता डॉ. रजनीश सिंह ने भी इस मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि दान राशि से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय या किसी अन्य सक्षम केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए। साथ ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
विवाद के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष लगातार मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा की ओर से भी निष्पक्ष जांच की मांग सामने आने के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
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