
यूपी डेस्क: अगर आप भी सड़क किनारे या बाजार में मिलने वाले मोमोज खाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। कानपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच के दौरान मोमोज बनाने वाली तीन इकाइयों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कार्रवाई के दौरान करीब 115 किलोग्राम संदिग्ध चटनी को मौके पर ही नष्ट कराया गया। वहीं मोमोज और चटनी के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि अभियान के दौरान कई स्थानों पर साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है।
ठेलों पर बिकने वाले मोमोज भी जांच के दायरे में
कार्रवाई केवल मोमोज बनाने वाली इकाइयों तक सीमित नहीं रही। मसवानपुर क्षेत्र में सड़क किनारे मोमोज बेचने वाले ठेलों की भी जांच की गई। निरीक्षण के दौरान रंगीन फिंगर चिप्स और चटनी भी खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिली, जिसके बाद इन्हें भी मौके पर नष्ट करा दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि जहां भी खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मोमोज से ज्यादा चटनी बन सकती है बीमारी की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में मोमोज की तुलना में उसके साथ परोसी जाने वाली चटनी अधिक जोखिम पैदा करती है। यदि चटनी लंबे समय तक खुले में रखी जाए, बार-बार इस्तेमाल की जाए या दूषित पानी से तैयार की गई हो, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। बरसात के मौसम में नमी के कारण संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
मोमोज खाते समय इन बातों का रखें ध्यान
मोमोज हमेशा ऐसी जगह से खरीदें जहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता हो। यह भी सुनिश्चित करें कि चटनी ढककर रखी गई हो और दुकानदार साफ बर्तनों या दस्तानों का उपयोग कर रहा हो। साथ ही खाद्य प्रतिष्ठान के पास खाद्य पंजीकरण होना भी जरूरी है।
लापरवाही पड़ सकती है भारी, बढ़ सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा
दूषित या बासी मोमोज और खराब चटनी का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया और वायरस पनप सकते हैं, जिससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द, मरोड़, मतली और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में पेट और आंत का संक्रमण, शरीर में पानी की कमी और दूषित पानी के कारण टायफाइड या हैजा जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए हमेशा ताजे, अच्छी तरह भाप में पके और स्वच्छ वातावरण में तैयार किए गए मोमोज का ही सेवन करना चाहिए।
Navyug Samachar