
नेशनल डेस्क : देश की राजनीति में इन दिनों दलबदल और राजनीतिक पुनर्संरचना का दौर तेज होता नजर आ रहा है। महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल तक विपक्षी दलों में लगातार टूट, असंतोष और बगावत की खबरें सामने आ रही हैं। इन बदलते घटनाक्रमों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसदीय ताकत बढ़ने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा है कि क्या एनडीए संसद में उस निर्णायक स्थिति के करीब पहुंच रहा है, जहां बड़े संवैधानिक फैसलों का रास्ता आसान हो सकता है।
परिसीमन विधेयक के बाद बदले राजनीतिक हालात
राजनीतिक हलचल की शुरुआत अप्रैल 2025 में मानी जा रही है, जब केंद्र सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया था। प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 करने और परिसीमन को 2011 की जनगणना से जोड़ने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि सदन में इसे आवश्यक समर्थन नहीं मिल सका। विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। दो-तिहाई बहुमत से लगभग 54 वोट दूर रह जाने के कारण सरकार यह बिल पारित नहीं करा सकी। उस समय इसे केंद्र सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया था।
विपक्षी खेमे में बढ़ी हलचल, कई दलों में असंतोष
परिसीमन विधेयक के बाद कई विपक्षी दलों के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे। आम आदमी पार्टी में कथित तौर पर बड़े स्तर पर असंतोष देखने को मिला, जहां राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के पार्टी छोड़ने और भाजपा के साथ जाने की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आईं। कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए। महाराष्ट्र में भी शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के अलग रुख अपनाने की अटकलों ने विपक्षी एकता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
लोकसभा में बढ़ती ताकत से बदली तस्वीर
2024 के लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन था। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और विभिन्न दलों से मिल रहे समर्थन के बाद गठबंधन की संख्या बढ़कर 319 तक पहुंचने की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ और सांसद या दल एनडीए के साथ आते हैं तो गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच सकता है। लोकसभा में किसी संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए 360 वोटों की आवश्यकता होती है, ऐसे में संख्या बल की यह बढ़त बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राज्यसभा में भी मजबूत हुआ गठबंधन
ऊपरी सदन में भी एनडीए की स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत बताई जा रही है। हाल के चुनावों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बाद गठबंधन का आंकड़ा करीब 150 सीटों तक पहुंचने की चर्चा है। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में एनडीए इस लक्ष्य से अब पहले की तुलना में काफी नजदीक दिखाई दे रहा है।
आने वाले महीनों पर टिकी राजनीतिक नजरें
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में जारी सियासी उथल-पुथल आने वाले समय में संसद के शक्ति संतुलन को और प्रभावित कर सकती है। यदि विपक्षी दलों में टूट और राजनीतिक पुनर्संरचना का सिलसिला जारी रहता है, तो संसद के दोनों सदनों में संख्याबल का समीकरण बदल सकता है। ऐसे में भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक प्रस्तावों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
Navyug Samachar