
यूपी डेस्क : अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और चोरी के मामले में आखिरकार बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस ने आठ नामजद आरोपितों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। बीते करीब 18 दिनों से चर्चा में बने इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर रामजन्मभूमि थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की जांच और तेज होने की संभावना है।
दानपात्र से करोड़ों रुपये गायब होने के आरोप के बाद मचा था बवाल
मामले ने उस समय तूल पकड़ा था जब 7 जून को समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की कथित चोरी का आरोप लगाया था। आरोप सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई थी। उसी दिन विपक्ष की ओर से भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
ट्रस्ट के स्पष्टीकरण के बाद भी जारी रही जांच की मांग
आरोप लगने के कुछ घंटों बाद ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया था और आरोपों को खारिज किया गया था। हालांकि मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा। इसके बाद केंद्र और राज्य स्तर पर भी इस प्रकरण को गंभीरता से लिया गया।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट, सरकार ने बनाई एसआईटी
10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को लखनऊ मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अगुवाई में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। एसआईटी को मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई एफआईआर
सूत्रों के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक जांच में कुछ लोगों की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाई गई। इसके बाद ट्रस्ट से जुड़े लोगों और कर्मचारियों से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच, बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी।
इसी सिफारिश के आधार पर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया है।
इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
एफआईआर में अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। जांच एजेंसियां अब इन सभी की भूमिका की विस्तृत पड़ताल करेंगी।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इनमें संपत्ति की चोरी, आपराधिक विश्वासभंग, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश और सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
सबसे गंभीर आरोपों में जिम्मेदारी के पद पर रहते हुए सौंपे गए धन या संपत्ति के कथित दुरुपयोग और गबन से संबंधित धाराएं शामिल हैं। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा का प्रावधान है।
लगातार 13 दिनों तक चली गहन जांच
एसआईटी ने जांच के दौरान ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों, बैंक अधिकारियों और नकदी गिनती से जुड़ी एजेंसियों से पूछताछ की। मंदिर परिसर में घंटों तक दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों की जांच की गई। बैंक खातों, नकदी जमा रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की गई।
23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, जिसके दो दिन बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई।
एसआईटी ने दिए कई अहम सुझाव
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश के साथ-साथ मंदिर प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन में सुधार के लिए भी कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें ट्रस्ट के पुनर्गठन, प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने, दानराशि का नियमित ऑडिट कराने, दैनिक नकदी प्रविष्टि सुनिश्चित करने और सीसीटीवी डेटा स्टोरेज अवधि बढ़ाने जैसे सुझाव शामिल बताए जा रहे हैं।
अब जांच के अगले चरण पर नजर
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस और एसआईटी की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
Navyug Samachar