
उत्तर प्रदेश डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। जांच के दायरे में नए नाम आने के बाद पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए आठों आरोपियों के संपर्क में रहे करीब 20 लोगों के जिला छोड़ने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही 50 से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है और नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी है।
आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों पर कड़ी निगरानी
मामले के विवेचक आशुतोष तिवारी ने शुक्रवार को कई लोगों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए। जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े लोगों के संबंधों और गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई। पुलिस ने आठों आरोपियों के संपर्क में रहे करीब 20 लोगों के जिले से बाहर जाने पर रोक लगा दी है। वहीं 50 से अधिक लोगों को नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने और अपने बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
कॉल रिकॉर्ड और लेन-देन की हो रही पड़ताल
जांच एजेंसियां आरोपियों के करीबियों से मिली जानकारी का मिलान आरोपियों के बयानों, कॉल डिटेल, वित्तीय लेन-देन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से कर रही हैं। पुलिस की अलग-अलग टीमें सूची में शामिल लोगों से फोन और अन्य माध्यमों के जरिए संपर्क कर पूछताछ के लिए बुला रही हैं। उनसे आरोपियों के साथ संबंध, आर्थिक लेन-देन, मुलाकातों और अन्य गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकांश लोगों को जांच पूरी होने तक पुलिस के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
चोरी की कुल रकम पर अब भी बना हुआ है संशय
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की कुल राशि को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच में सामने आया है कि गणना शुरू होने से पहले कितनी रकम गायब हुई, इसका सटीक आकलन संभव नहीं है। फिलहाल बरामद नगदी, संपत्ति के दस्तावेज, आभूषण और अन्य सामान के आधार पर ही चोरी की रकम का अनुमान लगाया जा रहा है।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि गणना पूरी होने के बाद बैंक में जमा हुई राशि का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है। ऐसे में जांच एजेंसियों का मानना है कि चोरी गणना प्रक्रिया या नकदी के प्रबंधन के दौरान की गई।
एसआईटी जांच में सामने आए कई अहम तथ्य
विशेष जांच दल और पुलिस की जांच में अब तक यह सामने आया है कि चढ़ावे की चोरी गणना या नकदी प्रबंधन के दौरान हुई। बैंक तक पहुंची राशि का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है। सीसीटीवी फुटेज में भी गणना से जुड़े कर्मचारी नोट और नोटों की गड्डियां छिपाते हुए दिखाई दिए हैं। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चोरी की कुल रकम कितनी है और यह सिलसिला कब से चल रहा था।
जांच अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल बरामद नकदी को ही चोरी की पुष्टि की गई राशि माना जा रहा है। इसके अलावा आरोपियों के पास से मिले वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, संपत्ति के दस्तावेज और आभूषणों की भी जांच की जा रही है। आशंका है कि इनकी खरीद चढ़ावे की रकम से की गई हो सकती है। हालांकि कुल चोरी की राशि का अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ इस मामले से जुड़ी तीन याचिकाओं पर विचार करेगी।
टिन्नू और सुभाष को भी कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी
पुलिस अब मामले के आरोपी टिन्नू और सुभाष को भी कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इससे पहले चार अन्य आरोपियों से रिमांड के दौरान पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस पहले जेल में दोनों से पूछताछ करेगी और उसके बाद अदालत से उनकी कस्टडी रिमांड की मांग करेगी। वहीं पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों से मिली जानकारी और साक्ष्यों का भी सत्यापन जारी है।
ट्रस्ट करेगा नए सीईओ की नियुक्ति
चढ़ावा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। निर्णय लिया गया है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति अब ट्रस्ट अपने स्तर पर करेगा और उनका वेतन भी ट्रस्ट ही वहन करेगा।
छह जुलाई को हुई बैठक में सीईओ चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम चयन पर फैसला लिया जाएगा।
22 जुलाई की बैठक में हो सकता है बड़ा फैसला
माना जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में नए सीईओ के चयन पर अंतिम चर्चा हो सकती है। इसी बैठक में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने, जवाबदेही तय करने और संचालन व्यवस्था में व्यापक बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।
प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई स्तरों पर लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैये का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में ट्रस्टी अनिल मिश्र द्वारा शक्तियों के दुरुपयोग का भी जिक्र किया गया है। इसके बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे हैं और विपक्ष लगातार ट्रस्ट को भंग करने की मांग कर रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में ट्रस्ट अब प्रशासनिक ढांचे को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत संचालन व्यवस्था में जवाबदेही तय करने, शक्तियों के दुरुपयोग पर रोक लगाने और ट्रस्ट के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि इन प्रस्तावों पर भी 22 जुलाई की बैठक में चर्चा हो सकती है।
Navyug Samachar