नेशनल डेस्क: कांवड़ यात्रा 2026 को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। इस वर्ष यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। देहरादून में आयोजित अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक में यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रतिबंध को समय रहते प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो।
अंतर्राज्यीय बैठक में बनी व्यापक रणनीति
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। कांवड़ यात्रा के दौरान राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत योजना तैयार की गई।
सीमाओं पर बनेंगे संयुक्त चेकपोस्ट और बैरियर
यात्रा के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त चेकपोस्ट और बैरियर स्थापित किए जाएंगे। साथ ही सभी राज्यों के बीच रियल टाइम सूचना साझा करने और समन्वय बनाए रखने के लिए आधुनिक सर्विलांस नेटवर्क सक्रिय रहेगा, जिससे किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
सोशल मीडिया पर रहेगी कड़ी निगरानी
प्रशासन ने डिजिटल माध्यमों पर फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए भी विशेष तैयारी की है। सभी राज्यों की साइबर सेल और सोशल मीडिया इकाइयों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी भ्रामक सूचना का तत्काल तथ्यात्मक खंडन किया जा सके और कानून व्यवस्था बनी रहे।
रेलवे को भी दिए गए विशेष निर्देश
बैठक में रेलवे अधिकारियों को कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनें संचालित करने और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन का उद्देश्य यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन को प्रभावी बनाना और यात्रियों को सुरक्षित सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
31 जुलाई से बढ़ेगी भीड़, 8 अगस्त से सबसे बड़ी चुनौती
प्रशासन के अनुसार, 31 जुलाई से 4 अगस्त तक पंचक का समय रहेगा। इसके बाद 5 अगस्त से कांवड़ियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि 8 अगस्त से शुरू होने वाला डाक कांवड़ का चरण सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला और चुनौतीपूर्ण रहेगा। इसे देखते हुए कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, पेयजल और संचार व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया तैयारियों का जायजा
बैठक में सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान सभी संबंधित राज्यों और एजेंसियों के बीच समन्वित व्यवस्था के माध्यम से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु यात्रा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर रहेगा।
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