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दूसरे राज्य में गाड़ी ले जाने वालों को बड़ी राहत! अब 3 साल तक नहीं कराना पड़ेगा री-रजिस्ट्रेशन, केंद्र सरकार ला रही नया नियम

नेशनल डेस्क: नौकरी, ट्रांसफर या कॉन्ट्रैक्ट के कारण दूसरे राज्य में रहने वाले लाखों वाहन मालिकों को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत दूसरे राज्य में ले जाए गए वाहन को बिना दोबारा पंजीकरण (री-रजिस्ट्रेशन) कराए रखने की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करने का प्रस्ताव है।

यह प्रस्ताव सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मोटर वाहन अधिनियम के मसौदा संशोधनों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य लोगों के लिए नियमों को आसान बनाना और दैनिक जीवन में अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करना है। पिछले सप्ताह इस प्रस्ताव को मंत्रियों के अनौपचारिक समूह के समक्ष भी रखा गया।

अभी क्या है नियम?

मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 47 के तहत यदि किसी राज्य में पंजीकृत वाहन लगातार एक वर्ष से अधिक समय तक दूसरे राज्य में रहता है, तो वाहन का उस राज्य में दोबारा पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया उन लोगों के लिए काफी जटिल साबित होती है जो सीमित समय के लिए दूसरे राज्य में नौकरी या अन्य कार्यों के कारण रहते हैं और बाद में अपने मूल राज्य लौट आते हैं। ऐसे मामलों में दोबारा पंजीकरण और फिर उसे निरस्त कराने की प्रक्रिया समय लेने वाली और असुविधाजनक होती है।

नए प्रस्ताव से मिलेगी तीन साल की राहत

प्रस्तावित संशोधन लागू होने के बाद वाहन मालिक अपने वाहन को दूसरे राज्य में लगातार तीन वर्ष तक बिना री-रजिस्ट्रेशन के रख सकेंगे। इससे विशेष रूप से स्थानांतरण वाली सरकारी और निजी नौकरियों में कार्यरत कर्मचारियों, निजी क्षेत्र के पेशेवरों और अल्पकालिक अनुबंध पर काम करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

बीएच सीरीज के बाहर के लोगों को भी मिलेगा फायदा

सरकार का यह प्रस्ताव भारत (बीएच) सीरीज पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। वर्तमान में बीएच सीरीज के तहत पंजीकृत वाहन देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में बिना री-रजिस्ट्रेशन के चलाए जा सकते हैं। नया प्रस्ताव उन वाहन मालिकों को भी सुविधा देगा, जिनके वाहन बीएच सीरीज में पंजीकृत नहीं हैं।

रोड टैक्स व्यवस्था में बदलाव की भी उठी मांग

पूर्व संयुक्त सचिव (परिवहन) अभय डामले ने कहा कि यह प्रस्ताव वाहन मालिकों के लिए राहत देने वाला है, लेकिन इससे समस्या का केवल एक हिस्सा ही हल होगा। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों में रोड टैक्स की अलग-अलग दरें अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि सभी राज्यों में रोड टैक्स की दरों में समानता लाई जाए, वाहन पोर्टल के जरिए पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और रोड टैक्स के अनुपातिक हस्तांतरण की पारदर्शी व्यवस्था विकसित की जाए।

जुर्माने के निपटारे के लिए भी आएगा नया प्रावधान

सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन कानून में एक नया प्रावधान जोड़ने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके तहत सभी राज्यों को छह महीने के भीतर जुर्माने के निपटारे के लिए अधिनिर्णायक प्राधिकरण नियुक्त करना होगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जुर्माने के निस्तारण की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

मंत्रालय का मानना है कि मोटर वाहन कानून की कई धाराओं के अपराधमुक्त होने के बाद जुर्मानों का निपटारा अदालतों के बजाय कार्यपालिका स्तर पर अधिक तेज़ और प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

 

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