
नेशनल डेस्क : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की करोड़ों रुपये की कथित चोरी के मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस टीम जिला जेल पहुंची और गिरफ्तार आरोपियों से करीब दो घंटे तक अलग-अलग पूछताछ की। इस दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी के तरीके, दान राशि के इस्तेमाल और गणना प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दावे किए। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान सबसे ज्यादा फोकस आरोपी अविनाश मिश्रा पर रहा। बताया जा रहा है कि उसके पास से सबसे अधिक बरामदगी हुई थी, इसलिए जांच एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। इसके साथ ही आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है।
चोरी के तरीके को लेकर पूछताछ में सामने आए दावे
सूत्रों के अनुसार आरोपियों ने दावा किया कि दान राशि की गिनती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कुछ खामियों का फायदा उठाकर रकम निकाली जाती थी। पुलिस ने विस्तार से यह जानने की कोशिश की कि पैसे किस तरह निकाले जाते थे, कहां छिपाए जाते थे और परिसर से बाहर कैसे पहुंचाए जाते थे। पूछताछ के दौरान ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा का नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है, लेकिन पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। जांच एजेंसियां आरोपियों के बयानों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान कर रही हैं।
एक व्यक्ति निकालता था रकम, बाकी बनाते थे सुरक्षा घेरा
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि दान राशि निकालने का काम एक व्यक्ति करता था, जबकि बाकी लोग उसके चारों ओर इस तरह खड़े रहते थे कि किसी को संदेह न हो। दावा किया गया कि निकाली गई रकम को पहले मंदिर परिसर के बाथरूम में छिपाया जाता था और बाद में अवसर मिलने पर बाहर पहुंचाया जाता था। पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन की थी पूरी जानकारी
सूत्रों के मुताबिक आरोपियों को मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और निगरानी व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी के आधार पर कथित तौर पर ऐसी योजना बनाई जाती थी जिससे कैमरों की सीधी नजर से बचा जा सके। पुलिस अब कंट्रोल रूम की ड्यूटी, कैमरों के रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
गणना कक्ष की चाबी को लेकर भी किया गया दावा
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि गणना कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मियों के पास होती थी। आरोपियों के अनुसार इसी व्यवस्था का फायदा उठाया गया। हालांकि बैंक कर्मचारियों की किसी भूमिका की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस दस्तावेजों व रिकॉर्ड के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
पिछले सप्ताह हुई थीं कई गिरफ्तारियां
इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टिन्नू यादव, गिनती प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जांच एजेंसियां लगातार नए साक्ष्य जुटाने में लगी हैं और जेल में हुई पूछताछ को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
बैंक ने नोटिस का दिया जवाब, भूमिका पर रखी स्थिति स्पष्ट
जांच के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा की अयोध्या शाखा से कुछ खातों की जानकारी मांगी गई थी। बैंक ने अपने जवाब में कहा कि उसकी भूमिका केवल ऑनलाइन दान तक सीमित है। बैंक के अनुसार क्यूआर कोड के जरिए प्राप्त होने वाली राशि सीधे बैंकिंग प्रणाली में दर्ज होती है, जबकि नकद चढ़ावे की गिनती, पैकिंग और बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में उसकी कोई भूमिका नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक राम जन्मभूमि ट्रस्ट को मिलने वाले कुल दान का लगभग 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के माध्यम से ऑनलाइन प्राप्त होता है, जबकि सबसे अधिक ऑनलाइन लेनदेन भारतीय स्टेट बैंक के जरिए होता है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों के खातों की भी जुटाई जा रही जानकारी
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों के बैंक खातों का भी विवरण जुटा रही हैं। इनमें महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के खाते भी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि अनिल मिश्रा ने हाल ही में एक इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए करीब 20 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया था। हालांकि जांच एजेंसियों ने अब तक यह नहीं कहा है कि इन खातों का चोरी के मामले से कोई सीधा संबंध सामने आया है।
आरोपियों के बैंक खातों का रिकॉर्ड भी खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा से आरोपी अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और सुप्रिया मिश्रा के खातों का ब्योरा मांगा था। बैंक ने बताया कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के नाम से खाते मौजूद हैं, जबकि सुप्रिया मिश्रा के नाम से इस शाखा में कोई खाता नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार मनीष यादव के खाते में फिलहाल करीब 1,400 रुपये जमा हैं और हाल के महीनों में उसमें कोई बड़ा लेनदेन दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस अब अन्य बैंकों और वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि कथित चोरी की रकम के संभावित लेनदेन का पता लगाया जा सके।
Navyug Samachar