
कोलकाता डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में सांसदों के एक बड़े समूह ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दावा किया जा रहा है कि 20 लोकसभा सांसदों ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों की गतिविधियां तेज हैं। सांसदों के इस कथित कदम को तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
काकोली घोष दस्तीदार ने किया बड़ा दावा
पूरे मामले को लेकर काकोली घोष दस्तीदार ने कहा है कि पार्टी के 20 सांसदों ने मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ असहमति जताई है। उनके अनुसार, यह समूह लोकसभा में अपनी अलग पहचान बनाने और एनडीए को समर्थन देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने संकेत दिए कि इस गुट में कई बड़े नाम शामिल हैं। हालांकि सभी सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
यूसुफ पठान का नाम आने से बढ़ी चर्चा
इस पूरे विवाद में सबसे अधिक चर्चा पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को लेकर हो रही है। बागी खेमे की ओर से उनके समर्थन का दावा किया जा रहा है। हालांकि यूसुफ पठान की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उनका नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।
महुआ मोइत्रा ने साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते संकट के बीच पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बागी नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कथित तौर पर यूसुफ पठान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और बगावत के पीछे की परिस्थितियों पर सवाल उठाए।
पार्टी के भीतर इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है, जिससे आंतरिक मतभेद और अधिक खुलकर सामने आते दिखाई दे रहे हैं।
सीट विवाद को माना जा रहा वजह
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हाल के महीनों में कुछ मुद्दों को लेकर पार्टी नेतृत्व और कुछ सांसदों के बीच मतभेद बढ़े थे। इन्हीं विवादों को मौजूदा राजनीतिक संकट की एक वजह माना जा रहा है।
हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
अलग समूह बनाने की तैयारी
बताया जा रहा है कि बागी सांसद सीधे किसी दूसरे दल में शामिल होने के बजाय संसद के भीतर अलग समूह के रूप में काम करने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो यह तृणमूल कांग्रेस के संसदीय इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों में से एक माना जाएगा।
लोकसभा में पार्टी की संख्या को देखते हुए यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। अब सभी की नजर पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति और बागी खेमे के अगले कदम पर टिकी हुई है।
Navyug Samachar