Thursday , 13 August 2026

CM सामूहिक विवाह योजना में बड़ा बदलाव: अब नहीं मिलेंगी पायल-बिछिया, दुल्हन के खाते में सीधे आएंगे ₹64 हजार

यूपी डेस्क : उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब योजना के तहत विवाह करने वाली दुल्हनों को चांदी की पायल और बिछिया उपहार स्वरूप नहीं दी जाएगी। इसकी जगह सरकार संबंधित राशि सीधे दुल्हन के बैंक खाते में भेजेगी। इस फैसले के पीछे चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और खर्च प्रबंधन को प्रमुख वजह माना जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत दुल्हन को मिलने वाली आर्थिक सहायता में वृद्धि होगी। पहले जहां 60 हजार रुपये सीधे खाते में भेजे जाते थे, वहीं अब पायल-बिछिया के लिए निर्धारित राशि जोड़कर 64 हजार रुपये सीधे दुल्हन के खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे।

एक लाख रुपये प्रति जोड़े पर होता है खर्च

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत राज्य सरकार प्रत्येक जोड़े पर कुल एक लाख रुपये खर्च करती है। पहले इस राशि में से 60 हजार रुपये दुल्हन के खाते में भेजे जाते थे, जबकि 25 हजार रुपये की लागत से पायल, बिछिया और अन्य उपहार सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी। शेष 15 हजार रुपये विवाह समारोह के आयोजन पर खर्च किए जाते थे।

अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपहार सामग्री पर 21 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि पायल और बिछिया के लिए निर्धारित 4 हजार रुपये सीधे लाभार्थी के खाते में भेजे जाएंगे।

चांदी की बढ़ती कीमत बनी वजह

योजना के तहत पहले समाज कल्याण विभाग की ओर से 65 टंच गुणवत्ता वाली 30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम बिछिया की खरीद की जाती थी। लेकिन हाल के समय में चांदी की कीमतों में लगातार तेजी और उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

वर्तमान बाजार दर के अनुसार चांदी की कीमत करीब ढाई लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। ऐसे में निर्धारित बजट के भीतर पायल और बिछिया की खरीद करना विभाग के लिए चुनौती बन रहा था।

दुल्हन खुद कर सकेगी खरीदारी

नई व्यवस्था के बाद दुल्हनों को अतिरिक्त 4 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में मिलेंगे। इससे लाभार्थी अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुसार आभूषण या अन्य जरूरी सामान खरीद सकेंगी।

सरकार का मानना है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से राशि भेजने से पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को अधिक सुविधा मिलेगी।

योजना के संचालन में आएगी पारदर्शिता

इस बदलाव से न केवल खरीद प्रक्रिया से जुड़ी जटिलताएं कम होंगी, बल्कि सरकारी धन के उपयोग में भी अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। साथ ही लाभार्थियों को सीधे आर्थिक सहायता मिलने से योजना का लाभ और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।

 

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