
हेल्थ डेस्क : बदलती जीवनशैली और लंबे समय तक बैठे रहकर काम करने की आदत अब कई स्वास्थ्य समस्याओं की बड़ी वजह मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार कुर्सी पर बैठे रहने से टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और शरीर में दर्द जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में दिनभर की दिनचर्या में एक छोटा बदलाव सेहत पर बड़ा असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय बीच-बीच में खड़े होकर काम करने से ब्लड शुगर के स्तर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। यह आदत शरीर को अधिक सक्रिय बनाए रखने के साथ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डाल सकती है।
शोध में क्या सामने आया?
यूनिवर्सिटी ऑफ चेस्टर के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में कई लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि दोपहर के भोजन के बाद करीब तीन घंटे के दौरान समय-समय पर खड़े होकर काम करने वाले लोगों में ब्लड शुगर स्तर कम दर्ज किया गया, जबकि लगातार बैठे रहने वालों में ऐसा प्रभाव नहीं देखा गया।
अध्ययन के मुताबिक, शरीर को नियमित अंतराल पर सक्रिय रखने से भोजन के बाद शुगर स्तर में होने वाले तेज बदलाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
खड़े होकर काम करने से और क्या फायदे हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, बीच-बीच में खड़े रहने से शरीर इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द की समस्या कम होने, मानसिक तनाव घटने और काम के दौरान ध्यान व ऊर्जा बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
कम समय तक लगातार बैठने वाले लोगों में एकाग्रता और मूड बेहतर रहने की संभावना भी देखी गई।
क्या होता है स्टैंडिंग डेस्क?
स्टैंडिंग डेस्क ऐसी विशेष मेज होती है जिसे खड़े होकर काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है। इसमें कंप्यूटर या ऑफिस का सामान्य काम आसानी से किया जा सकता है। कई मॉडल ऐसे भी होते हैं जिनकी ऊंचाई जरूरत के अनुसार बदली जा सकती है।
विशेषज्ञों ने बताया आसान तरीका
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें। हर 30 से 40 मिनट के बाद कुछ समय खड़े होकर काम करना या हल्का मूवमेंट करना शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। काम करते समय स्क्रीन आंखों के स्तर पर और हाथों की स्थिति आरामदायक रखना भी जरूरी माना जाता है।
हालांकि, केवल खड़े होकर काम करना डायबिटीज से बचाव या इलाज का विकल्प नहीं माना जाता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह भी उतनी ही जरूरी है।
Navyug Samachar