नेशनल डेस्क: असम में बाढ़ का कहर लगातार जारी है। राज्य के कई जिले भीषण जलभराव की चपेट में हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ताजा जानकारी के अनुसार, दो और लोगों की मौत के बाद बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 82 हो गई है। हजारों परिवार प्रभावित हैं, खेत पानी में डूब चुके हैं और कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।
15,430 हेक्टेयर फसल जलमग्न, घर और सड़कें भी क्षतिग्रस्त
बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 15,430 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा कई जिलों में मकान, सड़कें, पुल और अन्य सार्वजनिक ढांचा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य के प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और अन्य एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। हालांकि कई क्षेत्रों में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए सरकार का बड़ा फैसला
बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए असम सरकार ने कई अहम कदमों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार बीमा कंपनियों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के साथ समन्वय कर सबसे अधिक प्रभावित चार जिलों के लोगों के बीमा दावों का जल्द निपटारा कराने का प्रयास करेगी। इसके साथ ही इन जिलों के कर्जदारों के लिए लोन मोरेटोरियम लागू कराने की दिशा में भी पहल की जाएगी, ताकि प्रभावित परिवारों को कुछ समय के लिए ईएमआई और कर्ज की किस्तों के भुगतान से राहत मिल सके।
नुकसान का सर्वे अंतिम चरण में, जल्द मिलेगी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने बताया कि मकानों, पशुधन और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का सर्वे अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सर्वे पूरा होने के बाद प्रभावित परिवारों को मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य में तेजी लाई जा रही है, ताकि बाढ़ प्रभावित लोग जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।
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