
यूपी डेस्क : लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड की जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि जिस भवन में आग लगने से 15 बच्चों की जान चली गई, वहां वाणिज्यिक बिजली कनेक्शन लेने के लिए प्रस्तुत किया गया विद्युत सुरक्षा निदेशालय का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) फर्जी था। इस खुलासे के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और कई विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दस्तावेजों की जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भवन का घरेलू बिजली कनेक्शन वर्ष 2016 में जारी एक कथित एनओसी के आधार पर वाणिज्यिक श्रेणी में परिवर्तित किया गया था। नियमानुसार किसी भी व्यावसायिक या औद्योगिक बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय की मंजूरी अनिवार्य होती है।
हालांकि, जब संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया तो जांच अधिकारियों को बड़ा अंतर मिला। विभागीय अभिलेखों में प्रस्तुत एनओसी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद दस्तावेज पर दर्ज हस्ताक्षरों और एनओसी संख्या की जांच कराई गई, जिसमें सामने आया कि हस्ताक्षर फर्जी थे और इस्तेमाल किया गया एनओसी नंबर किसी अन्य संस्थान के नाम पर जारी किया गया था।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गहराए सवाल
सोमवार को हुए इस भीषण हादसे के बाद से ही भवन की सुरक्षा व्यवस्था और नियामकीय प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब फर्जी एनओसी का मामला उजागर होने के बाद यह आशंका और मजबूत हो गई है कि बिजली कनेक्शन से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार जांच में प्रस्तुत एनओसी पूरी तरह से फर्जी पाई गई है और विभाग के रिकॉर्ड में उससे जुड़ी कोई जानकारी मौजूद नहीं है। इस खुलासे ने हादसे की जांच को और गंभीर बना दिया है।
प्रदेशभर में बिजली कनेक्शनों की वैधता पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद अब केवल एक भवन नहीं, बल्कि प्रदेशभर में जारी वाणिज्यिक बिजली कनेक्शनों की वैधता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 26.26 लाख से अधिक वाणिज्यिक उपभोक्ता हैं, जिनमें 6 लाख से ज्यादा केवल मध्यांचल क्षेत्र में आते हैं।
ऐसी स्थिति में सभी एनओसी और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अधिकारियों के सामने अब यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि कहीं अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की अनियमितताएं तो नहीं हुई हैं।
बिजली कंपनियों और अधिकारियों की बढ़ सकती है मुश्किल
सूत्रों के मुताबिक कई मामलों में फर्जी एनओसी के आधार पर बिजली कनेक्शन मंजूर कराए जाने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि ऐसे मामलों की संख्या कुल वाणिज्यिक कनेक्शनों के लगभग 25 प्रतिशत तक हो सकती है।
यदि आगामी जांच में इसी प्रकार की और अनियमितताएं सामने आती हैं तो बिजली वितरण कंपनियों के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है। ऐसे में यह मामला सिर्फ एक हादसे तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में बिजली कनेक्शन स्वीकृति व्यवस्था की व्यापक जांच का कारण बन सकता है।
Navyug Samachar