नेशनल डेस्क: 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े दो अहम विधेयकों को संसद में पेश कर सकती है। इसी बीच विपक्षी दलों के रुख को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। खासतौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के बयान के बाद राजनीतिक समीकरणों पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।
परिसीमन पर सुप्रिया सुले के बयान से बढ़ी चर्चा
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने परिसीमन को लेकर कुछ शर्तों के साथ समर्थन के संकेत दिए हैं। उनके अनुसार, यदि केंद्र सरकार परिसीमन प्रक्रिया में तथाकथित ’50 प्रतिशत फॉर्मूला’ अपनाती है, तो उनकी पार्टी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपना सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस फॉर्मूले के तहत राज्यों में सीटों का निर्धारण केवल आबादी के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि लोकसभा की कुल सीटों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है। खबर में यह भी कहा गया है कि गृह मंत्री अमित शाह पहले विपक्ष को इस संबंध में लिखित आश्वासन देने की बात कह चुके हैं।
महाराष्ट्र की बैठकों पर भी टिकी नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में हाल के दिनों में कई अहम राजनीतिक मुलाकातें हुई हैं। बताया गया है कि शरद पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इसके बाद अजीत पवार गुट के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने भी फडणवीस से बैठक की।
इसी दौरान दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच भी बैठक हुई, जिसमें रिपोर्ट के अनुसार उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर आए छह सांसद भी मौजूद थे।
संविधान संशोधन के लिए कितना चाहिए समर्थन?
रिपोर्ट के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। खबर में दिए गए संभावित राजनीतिक गणित के अनुसार:
| राजनीतिक दल/गठबंधन | संभावित सांसद |
|---|---|
| एनडीए | 292 |
| तृणमूल कांग्रेस (बागी गुट) | 20 |
| डीएमके | 22 |
| एनसीपी (शरद पवार गुट) | 8 |
| शिवसेना (उद्धव बागी गुट) | 6 |
| कुल संभावित समर्थन | 348 |
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 360 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए सरकार को 12 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी, जिसके लिए वाईएसआरसीपी, अकाली दल और निर्दलीय सांसदों से बातचीत जारी है।
क्या है परिसीमन और इसकी जरूरत?
परिसीमन का अर्थ जनसंख्या के आधार पर लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए प्रस्ताव के लागू होने पर लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 815 से 850 के बीच हो सकती है। इसके बाद महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 1971 में देश की आबादी लगभग 55 करोड़ थी और एक सांसद औसतन 10 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता था। वहीं 2026 में आबादी बढ़कर करीब 145 करोड़ होने के कारण प्रति सांसद प्रतिनिधित्व का औसत लगभग 26 लाख लोगों तक पहुंच गया है।
मानसून सत्र में पेश हो सकते हैं दो अहम संशोधन विधेयक
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार मानसून सत्र में दो संविधान संशोधन विधेयक भी ला सकती है।
पहला, 130वां संविधान संशोधन विधेयक, जिसके तहत यदि कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन से अधिक समय तक जेल में रहता है तो उसे पद से हटाने का प्रावधान किया जा सकता है।
दूसरा, 131वां संविधान संशोधन विधेयक, जिसके जरिए पहले से पारित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
Navyug Samachar
