नेशनल डेस्क: टाटा समूह में बड़े नेतृत्व बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। वह अपने मौजूदा कार्यकाल के समाप्त होने तक यानी फरवरी 2027 तक टाटा सन्स के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। उनके इस्तीफे के बाद अब समूह के अगले चेयरमैन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जनवरी 2017 में संभाली थी टाटा सन्स की कमान
एन चंद्रशेखरन ने जनवरी 2017 में टाटा सन्स के चेयरमैन का पद संभाला था। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने करीब एक दशक के दौरान कई नए क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया।
टाटा समूह ने उनके कार्यकाल में विमानन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, डिजिटल कारोबार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इसी दौरान एयर इंडिया का अधिग्रहण भी समूह के सबसे बड़े कारोबारी फैसलों में शामिल रहा।
18 अगस्त को होने वाली है टाटा सन्स की AGM
एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है जब टाटा सन्स की वार्षिक आम बैठक यानी AGM 18 अगस्त को प्रस्तावित है। इस बैठक में उनके निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त किए जाने पर विचार होना था। चूंकि टाटा सन्स के चेयरमैन का पद कंपनी के बोर्ड में उनकी सदस्यता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
फिलहाल टाटा समूह की ओर से उनके उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरवरी 2027 में चंद्रशेखरन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद टाटा सन्स की कमान किसके हाथों में जाएगी।
टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट के बीच मतभेद की भी होती रही चर्चा
एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर पिछले कुछ समय से टाटा सन्स और टाटा ट्रस्ट के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं। दोनों पक्षों के बीच समूह की रणनीति, नए कारोबार में निवेश, पूंजी की जरूरत और टाटा सन्स की भविष्य की दिशा जैसे मुद्दों पर अलग-अलग राय होने की चर्चा रही है।
टाटा सन्स में टाटा ट्रस्ट की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में कंपनी के चेयरमैन के भविष्य और नेतृत्व से जुड़े फैसलों में टाटा ट्रस्ट की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।
वित्त वर्ष 2025-26 में मुनाफा 21.8 फीसदी बढ़ा
एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा सन्स के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का स्टैंडअलोन मुनाफा 21.8 फीसदी बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कंपनी का राजस्व 9.1 फीसदी बढ़कर 42,366.55 करोड़ रुपये रहा।
हालांकि, एयर इंडिया समेत समूह के कुछ नए कारोबारों में किए गए भारी निवेश के चलते घाटा भी बढ़ा है। इसके बावजूद एन चंद्रशेखरन इन निवेशों को लंबे समय के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम बताते रहे हैं।
Navyug Samachar