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राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़! ‘कागभुसुंडि’ गायब होने के दावे पर गरमाई सियासत, अखिलेश बोले- ‘बिना तीर की कमान है SIT’

यूपी डेस्क : अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और दान सामग्री विवाद ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बीच अब चांदी का कागभुसुंडि गायब होने का दावा सामने आने से मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है। इसी मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तीखा तंज कसा है।

राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी ने छह दिनों की पड़ताल के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और टीम को आगे भी कई पहलुओं की पड़ताल करनी है।

‘एफआईआर के बिना SIT बेअसर’ : अखिलेश यादव

चांदी का कागभुसुंडि गायब होने के दावे के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एफआईआर के बिना एसआईटी “बिना तीर की कमान” जैसी है।

अखिलेश ने आरोप लगाया कि दान, चढ़ावा और चंदे से जुड़े मामलों में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब रोज नए आरोप सामने आ रहे हैं तो जांच से क्या हासिल होगा, विशेषकर तब जब जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हों।

चांदी का कागभुसुंडि गायब होने का दावा

मामले में नया मोड़ तब आया जब एक महिला श्रद्धालु ने दावा किया कि उन्होंने रामलला को समर्पित करने के लिए चांदी का कागभुसुंडि दान किया था।

महिला का आरोप है कि मंदिर परिसर में अत्यधिक भीड़ होने के कारण उनसे कारसेवकपुरम में दान सामग्री ली गई थी। उनका कहना है कि कई बार संपर्क करने के बावजूद उन्हें इसकी रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई और अब दान की गई वस्तु का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।

पहले भी सामने आ चुके हैं कई आरोप

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई लोगों ने दान में दी गई चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगाए हैं।

आरोपों में चांदी की ईंटें, रत्नजड़ित हार और चांदी की चरण पादुकाओं जैसी वस्तुओं का उल्लेख किया गया है। इन दावों के बाद दान सामग्री के रिकॉर्ड और प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

15 जून से चल रही है एसआईटी जांच

दान राशि और चढ़ावे से जुड़े आरोप सामने आने के बाद 15 जून को एसआईटी ने अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मचारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई।

सूत्रों के अनुसार, कई दौर की पूछताछ के बाद तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी गई है। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

आभूषणों और भूमि खरीद के मामलों की भी होगी पड़ताल

जांच एजेंसियों के सामने अब केवल चढ़ावे का मामला ही नहीं है, बल्कि दान में मिले आभूषणों और भूमि खरीद से जुड़े आरोप भी जांच के दायरे में हैं।

सूत्रों के मुताबिक एसआईटी उन लोगों से भी संपर्क कर रही है जिन्होंने दान सामग्री गायब होने या अन्य अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा मंदिर से जुड़ी भूमि खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की भी जांच की जाएगी।

स्थानीय लोगों से भी होगी पूछताछ

जानकारी के अनुसार, भूमि खरीद से जुड़े आरोपों की जांच के लिए कुछ स्थानीय लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दान राशि के उपयोग और भूमि खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।

फिलहाल पूरे मामले पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है और एसआईटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

 

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