Thursday , 10 September 2026

TMC में ‘तीन धड़ों’ की तस्वीर! कौन ममता के साथ, कौन बागी खेमे में और किसने साध रखी है चुप्पी?

कोलकाता डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी उथल-पुथल अब और गहराती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पहले विधायकों के बीच मतभेद की खबरें आईं और अब सांसदों के स्तर पर भी विभाजन की तस्वीर दिखाई दे रही है। मौजूदा हालात में टीएमसी तीन अलग-अलग खेमों में बंटी हुई नजर आ रही है।

एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा है, दूसरा गुट काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बगावती रुख अपनाए हुए है, जबकि तीसरा गुट अभी भी खामोशी साधे हुए है और किसी पक्ष में खुलकर सामने नहीं आया है।

20 सांसदों के समर्थन के दावे से बढ़ी हलचल

टीएमसी के बागी खेमे का दावा है कि लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 20 सांसद अलग समूह बनाने और एनडीए को समर्थन देने के पक्ष में हैं। इस दावे ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालांकि ममता बनर्जी के करीबी नेताओं का कहना है कि बागी खेमे के पास उतना समर्थन नहीं है जितना दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद पार्टी के भीतर गहराते मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं।

काकोली घोष के साथ कौन-कौन?

बागी खेमे की अगुवाई कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि बड़ी संख्या में सांसद उनके साथ हैं। सामने आए नामों में शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी, कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक शामिल बताए जा रहे हैं।

बागी गुट का कहना है कि सांसदों का यह समूह संसद में अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा दूसरा गुट

राजनीतिक संकट के बीच पार्टी का एक बड़ा वर्ग अब भी ममता बनर्जी के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। इस खेमे में अभिषेक बनर्जी, सायनी घोष, कीर्ति आजाद, महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय और कल्याण बनर्जी जैसे प्रमुख चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं।

इन नेताओं के हालिया बयानों से भी संकेत मिला है कि वे पार्टी नेतृत्व के साथ बने हुए हैं और बागी खेमे के दावों से सहमत नहीं हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा तीसरे ‘साइलेंट’ गुट की

टीएमसी के भीतर सबसे अधिक उत्सुकता उस तीसरे गुट को लेकर है, जिसने अब तक अपना रुख साफ नहीं किया है। यह समूह न तो खुले तौर पर बागी खेमे के साथ दिखाई दे रहा है और न ही ममता बनर्जी के समर्थन में कोई सार्वजनिक बयान दे रहा है।

इस खेमे में सजदा अहमद, रचना बनर्जी, प्रतिमा मोंडल, माला रॉय, मिताली बेग, शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे नाम चर्चा में हैं। इन नेताओं की चुप्पी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है।

बागी खेमे के दावों पर उठ रहे सवाल

काकोली घोष गुट जहां 20 सांसदों के समर्थन का दावा कर रहा है, वहीं ममता समर्थक नेता इस आंकड़े पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बागी गुट के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने का दावा वास्तविकता से दूर है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि संख्या को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और वास्तविक समर्थन का आंकड़ा कहीं कम है। ऐसे में टीएमसी के भीतर जारी यह सियासी संघर्ष अब संख्या बल की लड़ाई में बदलता दिखाई दे रहा है।

बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा बड़ा असर

टीएमसी के भीतर बढ़ती खींचतान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सांसदों के अलग-अलग खेमों में बंटने की चर्चा ने आने वाले दिनों की राजनीतिक रणनीतियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि साइलेंट गुट आखिर किसके साथ खड़ा होता है और पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है।

 

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