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12 साल में सातवीं बार फ्रांस दौरे पर पीएम मोदी, जानिए भारत के लिए क्यों है इतना अहम साझेदार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस के दौरे पर रहेंगे। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी फ्रांस की सातवीं आधिकारिक यात्रा होगी। लगातार बढ़ती यह कूटनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि फ्रांस भारत की विदेश नीति में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बन चुका है।

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाले मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा पीएम मोदी नीस में आयोजित ‘इंडिया इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जिसमें दोनों देशों के 120 से अधिक स्टार्टअप, निवेशक और तकनीकी कंपनियां भाग लेंगी।

जी7 के सभी ट्रैक में भारत की मौजूदगी

इस बार फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका भी खास रहने वाली है। आमतौर पर भारत को जी7 प्लस सत्रों में आमंत्रित किया जाता रहा है, लेकिन इस बार फ्रांस ने भारत को सम्मेलन के सभी प्रमुख ट्रैक में शामिल रखा है। इसे दोनों देशों के बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

मुश्किल दौर में भी फ्रांस ने नहीं छोड़ा साथ

भारत और फ्रांस के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत आपसी विश्वास है। 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद जब कई पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे, तब फ्रांस उन चुनिंदा देशों में शामिल था जिसने भारत से संवाद जारी रखा। उसी दौर में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव और मजबूत हुई।

संयुक्त राष्ट्र में भारत का मजबूत समर्थक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की दावेदारी का फ्रांस लगातार समर्थन करता रहा है। कश्मीर, आतंकवाद और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई मुद्दों पर भी फ्रांस ने भारत के पक्ष को समझते हुए समर्थन दिया है। इसके अलावा एमटीसीआर, वासेनार अरेंजमेंट और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप जैसे महत्वपूर्ण मंचों पर भी फ्रांस भारत के साथ खड़ा रहा है।

रक्षा सहयोग की पहचान बना राफेल

भारत-फ्रांस संबंधों में रक्षा सहयोग सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है। भारतीय वायुसेना के लिए खरीदे गए राफेल लड़ाकू विमान और नौसेना के लिए हुए राफेल-एम समझौते ने इस साझेदारी को नई ऊंचाई दी है। इसके अलावा स्कॉर्पीन पनडुब्बियां, मिसाइल तकनीक और रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन पर भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और तकनीक में बढ़ता सहयोग

इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस के बीच दशकों पुराना सहयोग है। मेघा-ट्रॉपिक्स, सारल और गगनयान जैसे मिशनों में दोनों देशों ने साझेदारी की है। वहीं परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

यूरोप में भारत का भरोसेमंद साथी

फ्रांस आज यूरोपीय संघ में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले दशक में दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है। डिजिटल सहयोग का उदाहरण यह है कि यूरोप में यूपीआई को अपनाने वाला पहला देश फ्रांस बना। दोनों देशों ने वर्ष 2026 को ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ के रूप में भी मनाने का फैसला किया है।

भारत और फ्रांस के रिश्ते अब केवल रक्षा या कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक, नवाचार, शिक्षा, ऊर्जा और वैश्विक रणनीतिक सहयोग तक फैल चुके हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी की लगातार फ्रांस यात्राएं दोनों देशों के संबंधों की गहराई को दर्शाती हैं।

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