Thursday , 10 September 2026

ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी का बड़ा कूटनीतिक दांव! यूरेनियम से अरबों के निवेश तक हुए ऐतिहासिक समझौते, भारत को मिलेंगे कई बड़े फायदे

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के लिए एक अहम पड़ाव साबित होता दिख रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, निवेश और व्यापार सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। साथ ही व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) और द्विपक्षीय निवेश संरक्षण ढांचे को जल्द अंतिम रूप देने पर भी सहमति बनी है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

यूरेनियम निर्यात पर बनी अहम सहमति

इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम निर्यात पर बनी सहमति को माना जा रहा है। समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यूरेनियम की आपूर्ति करेगा। भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है और ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

ऊर्जा जरूरतों से लेकर रोजगार तक मिलेगा लाभ

दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन, तकनीक और निवेश से जुड़े सहयोग से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के उद्योग जगत से भारत की सड़क, बंदरगाह और शहरी आधारभूत ढांचा परियोजनाओं में निवेश का आह्वान किया। इस पर ऑस्ट्रेलिया के एक प्रमुख निवेश समूह ने भारत के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में अतिरिक्त 50 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (347 मिलियन अमेरिकी डॉलर) निवेश करने पर सहमति जताई।

हरित ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ेगा सहयोग

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, महत्वपूर्ण खनिजों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की आधुनिक तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन भारत के ऊर्जा परिवर्तन अभियान को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कम-कार्बन एल्यूमीनियम परियोजनाओं में साझेदारी की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारत को बताया करीबी मित्र

वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि बेहद करीबी मित्र भी हैं। उन्होंने कहा कि यूरेनियम निर्यात समझौता भारत में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन को बढ़ावा देगा, वहीं ऑस्ट्रेलिया के संसाधन क्षेत्र के लिए भी नए अवसर तैयार करेगा।

2014 के समझौते के बाद अब खुला नया रास्ता

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2014 में असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन परमाणु ईंधन के शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के कारण यूरेनियम निर्यात सीमित रहा। नई सहमति के बाद इस क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।

भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश का न्योता

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों से भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सड़क, रेलवे, बंदरगाह और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत निवेशकों के लिए सुरक्षित, स्थिर और दीर्घकालिक विकास का विश्वसनीय केंद्र बनकर उभर रहा है।

इसी दौरान ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड ऑस्ट्रेलियनसुपर ने भारत के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में अतिरिक्त 50 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 347 मिलियन अमेरिकी डॉलर) निवेश करने की घोषणा भी की।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाला कदम माना जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में हुए ये समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं।

 

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