Thursday , 1 October 2026

Property Buying Tips: जमीन खरीदने से पहले ये 7 कागज जरूर जांचें, एक गलती और फंस सकता है आपका पैसा

नेशनल डेस्क: जमीन खरीदना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा आर्थिक फैसला होता है. लोग अपनी वर्षों की जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट, मकान या खेती की जमीन खरीदते हैं. ऐसे में सिर्फ जमीन पसंद आने या बेचने वाले की बात पर भरोसा करके पैसा देना भारी पड़ सकता है. कई मामलों में जमीन किसी और के नाम होती है, उस पर बैंक का कर्ज या बंधक होता है या फिर संपत्ति को लेकर पहले से विवाद चल रहा होता है. इसलिए खरीदारी से पहले जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है.

1. सेल डीड यानी रजिस्ट्री जरूर देखें

जमीन खरीदने से पहले उसकी सेल डीड यानी रजिस्ट्री की जांच करें. इससे जमीन के मौजूदा मालिक और उसे बेचने के अधिकार की जानकारी मिलती है. रजिस्ट्री में खसरा नंबर, जमीन का क्षेत्रफल और मालिक से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है. इन विवरणों का सरकारी रिकॉर्ड से मिलान करना भी जरूरी है.

2. मदर डीड से पता करें जमीन का पुराना इतिहास

मदर डीड से जमीन के पुराने मालिकाना हक की जानकारी मिलती है. इससे पता चलता है कि जमीन पहले किसके नाम थी और मौजूदा मालिक के पास उसका अधिकार किस तरह पहुंचा. खरीदारी से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बेचने वाले व्यक्ति को जमीन पर मालिकाना हक किस आधार पर मिला है.

3. इनकंब्रेंस सर्टिफिकेट की जांच करें

इनकंब्रेंस सर्टिफिकेट यानी ईसी से जमीन पर दर्ज कर्ज, बंधक या अन्य कानूनी लेन-देन की जानकारी मिल सकती है. अगर जमीन किसी बैंक के पास गिरवी है और खरीदार ने इसकी जांच किए बिना सौदा कर लिया, तो आगे चलकर परेशानी खड़ी हो सकती है.

4. खसरा-खतौनी या जमाबंदी रिकॉर्ड जरूर मिलाएं

खसरा-खतौनी, जमाबंदी या अन्य भूमि रिकॉर्ड में जमीन के मालिक, खसरा नंबर और क्षेत्रफल जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होती है. इन विवरणों का रजिस्ट्री समेत दूसरे दस्तावेजों से मिलान करें. खास तौर पर यह जांचना जरूरी है कि बेचने वाला जितनी जमीन बता रहा है, सरकारी रिकॉर्ड में भी उतनी ही जमीन दर्ज है या नहीं.

5. म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज की स्थिति देखें

म्यूटेशन को कई जगह दाखिल-खारिज के नाम से जाना जाता है. जमीन के मालिकाना हक में बदलाव के बाद सरकारी रिकॉर्ड में इसकी जानकारी दर्ज की जाती है. इसलिए यह जांचना जरूरी है कि जमीन बेचने वाले व्यक्ति का नाम संबंधित भूमि रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज है या नहीं.

6. नक्शे और जमीन की सीमाओं का मिलान करें

जमीन का नक्शा और उसकी चारों दिशाओं में मौजूद सीमाओं की जानकारी भी जांचें. कागजों में दर्ज क्षेत्रफल और मौके पर मौजूद जमीन में अंतर होने पर आगे विवाद खड़ा हो सकता है. प्लॉट खरीदते समय यह भी देखें कि वहां पहुंचने का रास्ता कहां से है और क्या उसका उल्लेख संबंधित रिकॉर्ड में मौजूद है.

7. जमीन पर कोई मुकदमा या विवाद तो नहीं

सौदा करने से पहले यह पता करना जरूरी है कि जमीन किसी अदालत के मामले, पारिवारिक विवाद, अधिग्रहण या किसी अन्य कानूनी समस्या में तो नहीं फंसी है. खासकर ऐसी जमीन खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जिसके एक से ज्यादा मालिक हों या जो विरासत में मिली हो.

सभी दस्तावेज मिलाने के बाद ही आगे बढ़ें

सिर्फ कागजों की मौजूदगी देखकर तुरंत पूरी रकम देना सही नहीं है. सभी दस्तावेजों में दर्ज मालिक का नाम, खसरा नंबर, जमीन का क्षेत्रफल और उसकी सीमाओं का आपस में मिलान करें. किसी भी जानकारी में अंतर या संदेह नजर आने पर सौदा आगे बढ़ाने से पहले उसकी जांच कराएं.

जरूरत पड़ने पर स्थानीय वकील या संपत्ति विशेषज्ञ से दस्तावेजों की जांच कराना भी उचित है. जमीन खरीदते समय सबसे जरूरी बात यही है कि सिर्फ विक्रेता की बात पर निर्भर न रहें, बल्कि हर महत्वपूर्ण जानकारी को संबंधित रिकॉर्ड से सत्यापित करने के बाद ही खरीदारी का फैसला लें.

 

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