Monday , 5 October 2026

छात्र आंदोलन पर SC सख्त, कहा- सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर नहीं कर सकते लाठीचार्ज; पुलिस कार्रवाई की जांच के निर्देश

नेशनल डेस्क: छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों पर सुप्रीम Court ने सोमवार को सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि केवल आंदोलन करने के आधार पर प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। पुलिस द्वारा कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग के मामलों में स्वतंत्र जांच की जरूरत है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं का उल्लेख किया गया। इस दौरान अदालत ने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।

सिर्फ आंदोलन के कारण बल प्रयोग उचित नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी आंदोलन को केवल विरोध प्रदर्शन होने के आधार पर दबाने के लिए लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। अदालत ने पुलिस द्वारा अंधाधुंध या जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच की बात कही। मामले में एक याचिका छात्र समूह की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों के साथ मारपीट की और जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया।

सिवान में हथियार इस्तेमाल के आरोप पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान एक अन्य याचिका में बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एके-47 राइफलों के इस्तेमाल का आरोप भी सामने रखा गया। इस मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई की जांच की जरूरत बताई। अदालत ने कहा कि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र तरीके से जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में दाखिल हुई जनहित याचिका

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर हाई लेवल जांच की मांग करने वाले वकील ने अब सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। इससे पहले उन्होंने इस मामले में मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था, जिस पर तत्काल संज्ञान नहीं लिया गया था।

याचिका में प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

सीसीटीवी से लेकर डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा दाखिल याचिका में अदालत से मांग की गई है कि संबंधित सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं। इन साक्ष्यों में सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, ड्रोन फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, पुलिस वायरलेस रिकॉर्ड, कॉल लॉग, कंट्रोल रूम रिकॉर्ड, तैनाती आदेश और जीपीएस रिकॉर्ड शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इन सभी साक्ष्यों को नष्ट होने, छेड़छाड़ या गायब होने से बचाया जाए और इन्हें उचित जांच एजेंसी व न्यायिक प्रक्रिया के सामने पेश किया जाए।

FIR और निष्पक्ष जांच की भी मांग

याचिका में यह भी मांग की गई है कि अगर उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर किसी पुलिस अधिकारी, लोक सेवक या अन्य व्यक्ति द्वारा संज्ञेय अपराध किए जाने की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। इसके साथ ही मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध आपराधिक जांच कराने की मांग भी की गई है।

 

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