Monday , 5 October 2026

संभल हिंसा केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द; यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये की कॉस्ट

नेशनल डेस्क: संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत की गई निवारक हिरासत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की कॉस्ट भी लगाई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को निवारक हिरासत का आधार बनाए जाने को लेकर था।

पुलिस हिरासत के कथित कबूलनामे पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान इस बात पर सवाल उठाया कि क्या पुलिस हिरासत में आरोपी की ओर से दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ एनएसए के तहत निवारक हिरासत का आदेश दिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को आधार बनाकर निवारक हिरासत का आदेश नहीं दिया जा सकता।

मुल्ला अफरोज को वर्ष 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में आरोपी बनाया गया था। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। अफरोज की ओर से कहा गया था कि उन्हें हिंसा के मामले में बाद में सामने आए कथित कबूलनामे के आधार पर जोड़ा गया।

हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट

मुल्ला अफरोज ने अपनी निवारक हिरासत को चुनौती देते हुए पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने जून 2026 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद अफरोज ने विशेष अनुमति याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट में हिरासत को चुनौती दी।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की। 8 सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

13 अक्टूबर 2025 को NSA के तहत हुई थी हिरासत

मुल्ला अफरोज को 13 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 3(2) के तहत हिरासत में लिया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने दलील दी थी कि संभल हिंसा के बाद क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति प्रभावित हुई थी।

सरकार के अनुसार, उपलब्ध सामग्री को देखते हुए भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए निवारक हिरासत जरूरी थी। वहीं हाईकोर्ट ने जून 2026 में कहा था कि हिरासत का आदेश संबंधित अधिकारी की संतुष्टि और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर लिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत रद्द कर यूपी सरकार पर लगाई कॉस्ट

अब सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की एनएसए के तहत निवारक हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की कॉस्ट भी लगाई है। फैसले में पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर निवारक हिरासत किए जाने के सवाल को महत्वपूर्ण माना गया।

इस फैसले के बाद संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की एनएसए के तहत हिरासत खत्म हो गई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला निवारक हिरासत के लिए पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के इस्तेमाल से जुड़े कानूनी सवाल पर भी केंद्रित रहा।

 

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