Tuesday , 27 October 2026

UP Electricity Bill: 10% ज्यादा बिजली बिल पर घिरा यूपीपीसीएल, नियामक आयोग ने मांगा हिसाब; उपभोक्ताओं को मिल सकती है बड़ी राहत

यूपी डेस्क : उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं से मई के बिल के साथ वसूले जा रहे 10 प्रतिशत अतिरिक्त ईंधन अधिभार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मामले में विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) से जवाब तलब किया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 19 जून तक हर हाल में यह बताया जाए कि अतिरिक्त अधिभार किस आधार पर तय किया गया।

आयोग की सख्ती के बाद अब लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। माना जा रहा है कि यदि अधिभार निर्धारण में अनियमितता पाई गई तो उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि आगामी बिजली बिलों में समायोजित की जा सकती है।

19 जून तक देना होगा पूरा ब्योरा

नियामक आयोग ने यूपीपीसीएल प्रबंधन को नोटिस जारी कर पूछा है कि 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार लगाने के लिए किन आंकड़ों, गणनाओं और दस्तावेजों का आधार लिया गया। आयोग ने यह भी कहा है कि ऐसी जानकारी पारदर्शिता के तहत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए थी।

बताया गया कि कॉरपोरेशन को पहले ही इस संबंध में जवाब देना था, लेकिन उसने अतिरिक्त समय की मांग की थी। प्रबंधन का कहना था कि दूसरे राज्यों की व्यवस्थाओं और नियामकीय ढांचे का अध्ययन करने के बाद जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।

हालांकि आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और सीमित समय देते हुए 19 जून तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे हैं 1610 करोड़ रुपये

वर्तमान में बिजली कंपनियां ईंधन अधिभार के नाम पर उपभोक्ताओं से लगभग 1610 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली कर रही हैं। जून में जारी किए जा रहे बिजली बिलों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया है, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसे दूसरे राज्यों की नीतियों की जानकारी नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में अधिभार तय करने के लिए इस्तेमाल किए गए वास्तविक आंकड़ों और गणनाओं का विवरण चाहिए।

अगले बिल में मिल सकता है समायोजन

आयोग के रुख को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि यदि अधिभार की गणना पर सवाल सही पाए गए तो उपभोक्ताओं से वसूली गई अतिरिक्त राशि अगले महीने के बिजली बिल में समायोजित की जा सकती है। इस संबंध में अंतिम फैसला यूपीपीसीएल के जवाब की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।

क्या है पूरा विवाद?

मामले की शुरुआत तब हुई जब विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। परिषद का आरोप है कि फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) की गणना में मार्च माह की वास्तविक बिजली खरीद लागत के अलावा करीब 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाया दावे और पूर्व अवधि की देनदारियां भी जोड़ दी गईं।

परिषद का कहना है कि ऐसा करना नियामकीय प्रावधानों और निर्धारित नियमों के विपरीत है। शिकायत के बाद आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए एक जून को नोटिस जारी किया था और अब विस्तृत जवाब मांगा है।

उपभोक्ताओं की नजर आयोग के फैसले पर

अब प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं की निगाहें 19 जून के बाद आने वाले आयोग के फैसले पर टिकी हैं। यदि आयोग अतिरिक्त वसूली को अनुचित मानता है तो उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर आर्थिक राहत मिल सकती है।

 

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