Thursday , 13 August 2026

रूसी तेल पर घेरा तो जयशंकर ने पलट दिया पूरा सवाल! बोले- हमारे दुश्मनों को हथियार बेचता है यूरोप

नेशनल डेस्क: रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत की लगातार हो रही आलोचना के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय देशों को तीखा जवाब दिया है। फिनलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यूरोप उन देशों को हथियार बेचता है, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाता है, जबकि भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा नहीं किया।

रूसी तेल खरीदने पर उठे सवाल का दिया करारा जवाब

फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतारंता टॉक्स’ कार्यक्रम में एक पैनल चर्चा के दौरान विदेश मंत्री से रूस से तेल खरीदने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक बाजार में रूस का तेल अधिक उपलब्ध था और पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से आपूर्ति प्रभावित हो रही थी, तब भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए खरीदारी की।

यूरोप की दोहरी नीति पर उठाए सवाल

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के हथियारों से कभी किसी यूरोपीय देश पर हमला नहीं हुआ, लेकिन यूरोप से बेचे गए हथियारों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि वर्षों से ऐसा होता आया है। ऐसे में भारत के फैसलों पर सवाल उठाने से पहले यूरोपीय देशों को अपने रवैये पर भी विचार करना चाहिए।

‘हम भारतीयों ने कभी यूरोप को खतरा नहीं पहुंचाया’

जयशंकर ने कहा कि भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे यूरोप की सुरक्षा को खतरा हो। इसके बावजूद भारत को लगातार कटघरे में खड़ा किया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं कर सकता।

अमेरिका का भी किया जिक्र

विदेश मंत्री ने चर्चा के दौरान वर्ष 2022 की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका ने भी भारत को रूसी तेल खरीदना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया था। उनका कहना था कि उस दौर में तेल की आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए यह जरूरी कदम माना गया था।

‘सिद्धांतों की नहीं, हितों की राजनीति होती है’

जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार नीतियां परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जब किसी देश के हित अनुकूल होते हैं तो एक नीति अपनाई जाती है और परिस्थितियां बदलते ही उसका रुख भी बदल जाता है। ऐसे में केवल नैतिकता और सिद्धांतों की बात करना वास्तविकता से दूर है।

भारत ने दोहराया अपना रुख

विदेश मंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत का दृष्टिकोण व्यावहारिक और संतुलित रहा है तथा भविष्य में भी देश इसी नीति पर आगे बढ़ेगा।

 

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