
नई दिल्ली: आज इंटरनेट सिर्फ मनोरंजन या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़ाई, कारोबार, बैंकिंग और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में इंटरनेट की रफ्तार भी किसी देश के डिजिटल विकास का महत्वपूर्ण पैमाना बन गई है। दुनिया के कुछ देशों में मोबाइल और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की डाउनलोड स्पीड 300 से 600 एमबीपीएस से भी ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि कुछ देश अब भी बेहद कम स्पीड से जूझ रहे हैं। ओक्ला के स्पीडटेस्ट ग्लोबल इंडेक्स के आंकड़े दुनिया के अलग-अलग देशों की इंटरनेट स्पीड की तस्वीर सामने रखते हैं। इसमें भारत ने मोबाइल इंटरनेट के क्षेत्र में बीते वर्षों में बड़ी छलांग लगाई है, हालांकि फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के मामले में अभी काफी पीछे है।
इंटरनेट स्पीड की रैंकिंग कैसे तय होती है
दुनिया भर में इंटरनेट की गति का आकलन करने के लिए ओक्ला का स्पीडटेस्ट ग्लोबल इंडेक्स प्रमुख स्रोतों में शामिल है। यह इंडेक्स दुनियाभर में किए गए करोड़ों स्पीडटेस्ट के आंकड़ों के आधार पर देशों की औसत डाउनलोड स्पीड का आकलन करता है। इसकी रैंकिंग हर महीने अपडेट होती है, इसलिए अलग-अलग महीनों में किसी देश की स्थिति में बदलाव देखा जा सकता है।
फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में सिंगापुर सबसे आगे
फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की बात करें तो 2025 के स्पीडटेस्ट ग्लोबल इंडेक्स के आंकड़ों में सिंगापुर सबसे आगे रहा। यहां औसत डाउनलोड स्पीड 345.33 एमबीपीएस दर्ज की गई। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात 313.55 एमबीपीएस और हॉन्ग कॉन्ग 312.48 एमबीपीएस की औसत डाउनलोड स्पीड के साथ शीर्ष देशों में शामिल रहे।
रैंकिंग में देशों की स्थिति लगातार बदलती रहती है। 2025 में चिली ने भी फिक्स्ड इंटरनेट के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वहां की इंटरनेट कंपनी मुंडो टेलीकम्यूनिकासियोनेस को ओक्ला ने 2025 का दुनिया का सबसे तेज फिक्स्ड नेटवर्क घोषित किया।
मोबाइल इंटरनेट में UAE का दबदबा
मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार में खाड़ी देशों का प्रदर्शन सबसे मजबूत दिखाई देता है। संयुक्त अरब अमीरात, कतर और कुवैत जैसे देश दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में काफी आगे हैं। संयुक्त अरब अमीरात 653 एमबीपीएस की मीडियन डाउनलोड स्पीड के साथ मोबाइल इंटरनेट के मामले में दुनिया में सबसे ऊपर है।
हालांकि तेज इंटरनेट का मतलब यह नहीं है कि वहां इंटरनेट सस्ता भी होगा। संयुक्त अरब अमीरात में एक जीबी मोबाइल डेटा की कीमत 4.61 डॉलर बताई गई है। इससे साफ है कि इंटरनेट की स्पीड और उसकी कीमत के बीच सीधा संबंध जरूरी नहीं है।
क्यूबा और सीरिया सबसे निचले पायदान पर
इंटरनेट स्पीड की वैश्विक तस्वीर में कुछ देश काफी पीछे हैं। क्यूबा और सीरिया जैसे देशों में औसत इंटरनेट स्पीड करीब 3.2 एमबीपीएस तक बताई गई है। यानी दुनिया के सबसे तेज और सबसे धीमे इंटरनेट वाले देशों के बीच स्पीड का अंतर करीब 100 गुना तक पहुंच जाता है।
भारत ने 5G के बाद लगाई लंबी छलांग
भारत की मोबाइल इंटरनेट स्पीड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव आया है। अक्टूबर 2022 में 5G सेवाओं की शुरुआत के बाद मोबाइल डाउनलोड स्पीड में तेज वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर 2022 में भारत की मोबाइल डाउनलोड स्पीड 13.87 एमबीपीएस थी, जो अगस्त 2023 तक बढ़कर 50.21 एमबीपीएस हो गई। यानी इस अवधि में स्पीड करीब 3.59 गुना बढ़ी और भारत वैश्विक रैंकिंग में 72 पायदान ऊपर चढ़कर 47वें स्थान पर पहुंच गया।
इसके बाद भी भारत की मोबाइल इंटरनेट स्पीड में सुधार जारी रहा। अगस्त 2024 में भारत की मीडियन मोबाइल डाउनलोड स्पीड 96.38 एमबीपीएस तक पहुंच गई, जबकि उस समय वैश्विक औसत 55.80 एमबीपीएस था। इस आंकड़े के साथ भारत मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में दुनिया में 20वें स्थान तक पहुंच गया था।
फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में भारत अभी पीछे
मोबाइल इंटरनेट में तेज सुधार के बावजूद घरों और दफ्तरों में इस्तेमाल होने वाले फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के क्षेत्र में भारत की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है। अगस्त 2024 के आंकड़ों में भारत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की वैश्विक रैंकिंग में 84वें स्थान पर था। उस समय देश में औसत डाउनलोड स्पीड 63.79 एमबीपीएस दर्ज की गई थी।
दुनिया के शीर्ष देशों में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की स्पीड 300 एमबीपीएस से अधिक है। इस लिहाज से भारत की फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड शीर्ष देशों की तुलना में करीब पांच गुना कम थी।
मोबाइल इंटरनेट आगे और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड पीछे क्यों
भारत में मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार शामिल है। मोबाइल टावर और 5G ढांचे में तेजी से निवेश हुआ, जिसका असर सीधे मोबाइल डाउनलोड स्पीड पर दिखाई दिया।
इसके विपरीत घर-घर फाइबर नेटवर्क पहुंचाना ज्यादा जटिल और समय लेने वाला काम है। विशाल आबादी, अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और बड़े क्षेत्रफल वाले भारत में हर घर तक फाइबर नेटवर्क पहुंचाने के लिए ज्यादा बुनियादी ढांचे और निवेश की जरूरत होती है। यही वजह है कि मोबाइल इंटरनेट की तुलना में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का विस्तार अपेक्षाकृत धीमा रहा है।
छोटे देश इंटरनेट स्पीड में क्यों आगे
वैश्विक रैंकिंग में एक खास पैटर्न दिखाई देता है। सिंगापुर, हॉन्ग कॉन्ग, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे छोटे देश इंटरनेट स्पीड के मामले में लगातार शीर्ष पर नजर आते हैं। छोटे क्षेत्रफल के कारण इन देशों में इंटरनेट ढांचे को अपग्रेड करना और बड़े हिस्से तक तेज नेटवर्क पहुंचाना तुलनात्मक रूप से आसान होता है।
भारत जैसे विशाल देश में यही काम अधिक चुनौतीपूर्ण है। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों और बड़ी आबादी तक समान गुणवत्ता वाला इंटरनेट पहुंचाने में अधिक समय और संसाधन लगते हैं। इसके बावजूद मोबाइल इंटरनेट में भारत की तेज प्रगति यह दिखाती है कि तकनीकी ढांचे और निवेश के विस्तार से कम समय में बड़ा बदलाव संभव है।
Navyug Samachar