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झारखंड का ‘IAS फैक्ट्री’ कहलाने वाला स्कूल! यहां से निकले करीब 3,000 IAS-IPS अधिकारी, देशभर में है अलग पहचान

एजुकेशन डेस्क: झारखंड के लातेहार जिले की पहाड़ियों के बीच स्थित नेतरहाट आवासीय विद्यालय अपनी उत्कृष्ट शिक्षा व्यवस्था और अनुशासन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस प्रतिष्ठित आवासीय स्कूल को अक्सर भारत की ‘IAS फैक्ट्री’ कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि यहां से पढ़ाई करने वाले करीब 3,000 छात्र भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और अन्य सिविल सेवाओं में चयनित हो चुके हैं।

आजादी के बाद शुरू हुआ, दशकों से कायम है पहचान

आजादी के बाद स्थापित नेतरहाट आवासीय विद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, इस विद्यालय के करीब 3,000 पूर्व छात्र IAS, IPS और अन्य सिविल सेवाओं में चयनित हुए हैं। इसके अलावा यहां से पढ़े छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक, प्रोफेसर और विभिन्न क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। देश और विदेश के कई सरकारी, सार्वजनिक और निजी संस्थानों में भी इस विद्यालय के पूर्व छात्र उच्च पदों पर कार्यरत हैं।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी हुए थे प्रभावित

विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और आवासीय मॉडल से भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी प्रभावित बताए जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने इस तरह की शिक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए नैनीताल में भी इसी तर्ज पर एक संस्थान स्थापित करने की सिफारिश की थी। उनका उद्देश्य छात्रों को केवल शैक्षणिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास का अवसर उपलब्ध कराना था।

इन दिग्गजों ने इसी स्कूल से की पढ़ाई

नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पूर्व छात्रों में कई चर्चित नाम शामिल हैं। इनमें प्रसिद्ध गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह, पूर्व सीबीआई निदेशक डॉ. त्रिनाथ मिश्रा, पूर्व सीबीआई निदेशक डॉ. राकेश अस्थाना, आईपीएस अधिकारी अंजनी अंजन, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जे.बी. टुबिड, आईएएस अधिकारी मनीष रंजन और पूर्व प्रशासक सुखदेव भगत प्रमुख हैं। इन पूर्व छात्रों ने प्रशासन, कानून व्यवस्था और नीति निर्माण सहित कई क्षेत्रों में अहम योगदान दिया है।

पर्यटन के लिहाज से भी खास है यह परिसर

नेतरहाट आवासीय विद्यालय केवल शिक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राकृतिक वातावरण के लिए भी जाना जाता है। हरियाली और पहाड़ियों के बीच स्थित इसका परिसर झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में भी गिना जाता है। परिसर में मौजूद ऐतिहासिक नेतरहाट बंगला अपनी लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसे देखने हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

क्या बनाता है इस स्कूल को खास?

नेतरहाट आवासीय विद्यालय की पहचान उसकी कठोर चयन प्रक्रिया, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासित माहौल और छात्रों के सर्वांगीण विकास पर आधारित व्यवस्था से बनी है। यही वजह है कि दशकों बाद भी यह संस्थान देशभर के छात्रों और अभिभावकों के बीच प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों में अपनी अलग जगह बनाए हुए है।

 

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