
नेशनल डेस्क: शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पेपर लीक को लेकर चला आंदोलन नए राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है। जहां जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया, वहीं कांग्रेस ने दावा किया कि उसने भले ही मंच साझा नहीं किया, लेकिन छात्रों के आंदोलन को हर स्तर पर समर्थन दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का श्रेय किसी राजनीतिक दल को नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं को मिलना चाहिए।
केसी वेणुगोपाल बोले- यह छात्रों और युवाओं की जीत
एक बातचीत के दौरान केसी वेणुगोपाल से पूछा गया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय किसे मिलना चाहिए, कॉकरोच जनता पार्टी को या विपक्ष को। इस पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी तरह का श्रेय नहीं लेना चाहती। उनके मुताबिक, यह जनता की जीत है, जिसने सरकार के अहंकार, मनमानी, भ्रष्टाचार और संरक्षण में चल रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी रही।
राहुल गांधी लंबे समय से उठा रहे थे मुद्दा
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी हाल के दिनों में ही नहीं, बल्कि कई महीनों से छात्रों के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर और महात्मा गांधी स्मारक पर प्रदर्शन किया। इसके अलावा संसद के भीतर पांच दिनों तक विपक्ष ने इस मुद्दे पर संघर्ष किया और संसद के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किए। उनका कहना था कि इन सभी प्रयासों ने सरकार की कार्यशैली को उजागर किया।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस पूरे घटनाक्रम का आकलन करना चाहते हैं, वे स्वयं करेंगे। कांग्रेस को इसका श्रेय लेने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, घायल छात्र भी राहुल गांधी से मिलने पहुंचे थे, जो इस बात का संकेत है कि छात्र स्वयं स्थिति का मूल्यांकन कर रहे हैं।
जंतर-मंतर से दूरी पर कांग्रेस ने दी सफाई
कांग्रेस के जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल न होने को लेकर भी केसी वेणुगोपाल ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सीधे उस आंदोलन का हिस्सा बनती तो पूरा मुद्दा राजनीतिक रंग ले लेता। उनके अनुसार, आंदोलन अपनी मूल भावना के साथ आगे बढ़ा क्योंकि कांग्रेस ने प्रत्यक्ष रूप से उसमें हिस्सा नहीं लिया।
हालांकि उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के यूथ कांग्रेस और सेवा दल के कार्यकर्ता लगातार मौके पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों को पानी, भोजन, दवाइयां और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई।
टास्क फोर्स गठन पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने परीक्षा सुधारों के लिए केंद्र सरकार की नई टास्क फोर्स पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि वर्ष 2024 में गठित डॉ. के. राधाकृष्णन समिति ने 101 सिफारिशें दी थीं, लेकिन सरकार अब तक उन्हें पूरी तरह लागू नहीं कर सकी है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि जुलाई 2026 में नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बाद सरकार ने परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है। उनका आरोप है कि पहले से मौजूद सिफारिशों पर अमल किए बिना नई व्यवस्था बनाना वास्तविक सुधार की बजाय अलग संदेश देने की कोशिश है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच करीब दो वर्षों तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के लिए पूर्णकालिक महानिदेशक की नियुक्ति नहीं की गई। उनके मुताबिक, सरकार की नई पहल परीक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव लाने के बजाय प्रधानमंत्री की छवि सुधारने का प्रयास है।
टास्क फोर्स में किन-किन को मिली जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को परीक्षा सुधारों के लिए एक नई टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि करेंगे। इसके अन्य सदस्यों में इसरो के पूर्व निदेशक एस. सोमनाथ, आईबी के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।
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