
बिहार डेस्क: मुंगेर के टेटिया बंबर थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की को लेकर फरार होने के मामले में पॉक्सो विशेष न्यायालय ने आरोपी जीजा सौरभ कुमार साह को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। मामले की सुनवाई पॉक्सो अधिनियम के विशेष न्यायाधीश सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमलेंदु कुमार की अदालत में हुई।
शादी के एक महीने बाद ससुराल पहुंचा था आरोपी
मामला टेटिया बंबर थाना कांड संख्या 11/25 से जुड़ा है। अभियोजन के मुताबिक, पीड़िता की बड़ी बहन की शादी 21 जुलाई 2024 को झारखंड के गोड्डा निवासी सौरभ कुमार साह से हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के करीब एक महीने बाद सौरभ अपनी पत्नी के साथ उसके मायके पहुंचा।
आरोप है कि इसी दौरान सौरभ अपनी पत्नी को मायके में छोड़कर उसकी नाबालिग बहन को लेकर फरार हो गया। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन नाबालिग का कोई पता नहीं चला। इसके बाद 15 जनवरी 2025 को टेटिया बंबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस ने आरोपी और नाबालिग को बरामद किया
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी के साथ नाबालिग को बरामद कर लिया। इसके बाद पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई। अभियोजन के अनुसार, मेडिकल जांच में नाबालिग करीब तीन महीने की गर्भवती पाई गई।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद संबंधित धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया और मामले को स्पीड ट्रायल के लिए भेजा गया। सुनवाई के दौरान अदालत में 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जबकि 13 दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया।
गर्भपात के आवेदन के बाद मेडिकल बोर्ड का गठन
मामले की सुनवाई के दौरान नाबालिग ने अदालत में गर्भपात की अनुमति के लिए आवेदन दिया। अदालत ने मामले को देखते हुए सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया और चिकित्सकीय निगरानी में नाबालिग का गर्भपात कराया गया।
अदालत में गवाही के दौरान बदल गए बयान
मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त स्थिति बदल गई, जब पीड़िता, उसकी मां और आरोपी की पत्नी यानी पीड़िता की बड़ी बहन ने अदालत में अपने पहले के आरोपों से अलग बयान दे दिया। तीनों ने कहा कि आरोपी ने कुछ नहीं किया है।
गवाहों के बयान बदलने के बाद अभियोजन के सामने आरोपी के खिलाफ मामला साबित करने की चुनौती पैदा हो गई। विशेष लोक अभियोजक प्रीतम कुमार वैश्य ने मामले की जानकारी एसपी सैयद इमरान मसूद को दी। इसके बाद पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत से मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी यानी MTP रिपोर्ट, FSL रिपोर्ट और DNA रिपोर्ट मंगाने का अनुरोध किया।
DNA जांच में आरोपी को बताया गया जैविक पिता
अदालत के निर्देश पर संबंधित रिपोर्ट पेश की गईं। अभियोजन के अनुसार, DNA जांच में गर्भ में पल रहे भ्रूण के जैविक पिता के रूप में सौरभ कुमार साह की पुष्टि हुई।
अभियोजन ने इस रिपोर्ट को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर अदालत के सामने रखा। गवाहों के बयान बदलने के बावजूद दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया। इसके बाद पॉक्सो विशेष न्यायालय ने सौरभ कुमार साह को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
Navyug Samachar