Saturday , 24 October 2026

RBI ने बढ़ाया Repo Rate, अब आपकी EMI पर पड़ेगा कितना असर? होम, कार और पर्सनल लोन वालों को समझें पूरा गणित

नेशनल डेस्क: अगर आपकी हर महीने की EMI बजट का बड़ा हिस्सा खर्च कर देती है या आप आने वाले दिनों में घर या कार खरीदने के लिए लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो भारतीय रिजर्व बैंक का ताजा फैसला आपके लिए अहम है। आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब रेपो रेट बढ़ाया गया है। इसके साथ ही आरबीआई ने मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक की ईएमआई तुरंत 25 फीसदी या 25 बेसिस पॉइंट बढ़ जाएगी। वास्तविक असर आपके बैंक, लोन के प्रकार, ब्याज दर, बकाया रकम और लोन की बची हुई अवधि पर निर्भर करेगा। लेकिन फ्लोटिंग रेट वाले कर्जदारों के लिए ब्याज का दबाव बढ़ने की संभावना जरूर है।

रेपो रेट बढ़ने से ईएमआई क्यों बढ़ सकती है?

रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। जब इस दर में बढ़ोतरी होती है तो बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर उन कर्जों पर पड़ सकता है जो रेपो रेट या किसी बाहरी बेंचमार्क से जुड़े होते हैं।

ऐसे मामलों में बैंक ब्याज दर बढ़ने पर ग्राहक की ईएमआई बढ़ा सकता है या ईएमआई को समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ा सकता है। इसलिए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह नहीं है कि आपकी ईएमआई भी उतने ही अनुपात में बढ़ जाएगी।

होम लोन वालों पर सबसे पहले पड़ सकता है असर

फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन ग्राहक आरबीआई के इस फैसले का असर ज्यादा महसूस कर सकते हैं। अगर बैंक रेपो रेट में हुई पूरी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी ग्राहक तक पहुंचाता है और लोन की अवधि समान रखी जाती है, तो ईएमआई बढ़ सकती है।

मिसाल के तौर पर, 20 साल के लिए 50 लाख रुपये के होम लोन पर 8.50 फीसदी ब्याज की ईएमआई करीब 43,391 रुपये होती है। अगर ब्याज दर बढ़कर 8.75 फीसदी हो जाती है तो ईएमआई लगभग 44,186 रुपये हो सकती है। यानी करीब 795 रुपये प्रति माह का अंतर आएगा। हालांकि वास्तविक ईएमआई आपके बैंक और लोन की शर्तों पर निर्भर करेगी।

अगर बैंक ईएमआई में बढ़ोतरी नहीं करता है तो लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। इससे तुरंत मासिक बोझ कम रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि में ग्राहक को कुल ब्याज के रूप में ज्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है।

कार खरीदने वालों की जेब पर भी बढ़ सकता है बोझ

रेपो रेट का असर सिर्फ होम लोन तक सीमित नहीं है। अगर बैंक और वित्तीय कंपनियां अपनी कर्ज की दरों में बदलाव करती हैं तो नए कार लोन की लागत भी बढ़ सकती है।

ऐसे में कार खरीदने वालों को सिर्फ एक्स-शोरूम कीमत और डाउन पेमेंट पर ध्यान नहीं देना चाहिए। लोन की ब्याज दर, मासिक ईएमआई और पूरी अवधि में चुकाई जाने वाली कुल रकम को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।

पर्सनल लोन पर भी बढ़ सकता है ब्याज का दबाव

पर्सनल लोन आमतौर पर होम लोन की तुलना में ज्यादा ब्याज दर पर मिलते हैं। ऐसे में ब्याज दर में मामूली बदलाव भी कुल भुगतान पर असर डाल सकता है। जिन ग्राहकों का पर्सनल लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा है, उन्हें बैंक के अगले रीसेट पर इसका असर दिखाई दे सकता है।

फिक्स्ड रेट वालों पर तुरंत असर नहीं

अगर आपका लोन वास्तव में फिक्स्ड ब्याज दर पर है, तो मौजूदा लोन की ईएमआई पर रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर आमतौर पर नहीं पड़ता। हालांकि एमसीएलआर या किसी दूसरे बेंचमार्क से जुड़े लोन में असर बैंक की रीसेट व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग समय पर दिखाई दे सकता है।

इसलिए कर्जदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनका लोन किस ब्याज दर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है और बैंक ब्याज दर में बदलाव किस तरह लागू करता है।

एफडी में पैसा लगाने वालों के लिए क्या बदलेगा?

रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक अपनी फंडिंग जरूरत और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर जमा पर ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में कुछ बैंक एफडी की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।

हालांकि यह जरूरी नहीं है कि सभी बैंक तुरंत या समान अनुपात में दरों में बढ़ोतरी करें। यानी जहां कर्ज लेने वालों के लिए ब्याज लागत बढ़ने का जोखिम है, वहीं बचत और एफडी करने वालों को आने वाले समय में बेहतर जमा दरों का फायदा मिल सकता है।

महंगाई के बढ़ते जोखिम के बीच आरबीआई का बड़ा फैसला

आरबीआई के सामने इस समय महंगाई का बढ़ता जोखिम बड़ी चिंता है। अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी रही और आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर केंद्रीय बैंक का भरोसा मजबूत है। इसी अवधि के लिए उसने सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है।

ऐसे में आरबीआई ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए सख्ती का संकेत दिया है, जबकि आर्थिक विकास को लेकर उसका आकलन सकारात्मक बना हुआ है।

आगे ब्याज दरों को लेकर क्या होगा?

रेपो रेट बढ़ाने के साथ मौद्रिक नीति के रुख को ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ करना इस फैसले का अहम हिस्सा है। इससे संकेत मिलता है कि आरबीआई फिलहाल महंगाई को लेकर ज्यादा सतर्क है।

आगे ब्याज दरों को लेकर फैसला महंगाई, आर्थिक विकास, कच्चे तेल की कीमतों और दूसरी आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े आंकड़ों पर निर्भर करेगा। ऐसे में कर्ज लेने वालों को अपनी मौजूदा ईएमआई और ब्याज दर पर नजर रखनी चाहिए।

नया लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना भी जरूरी है। केवल कम ईएमआई देखकर फैसला लेने के बजाय पूरी लोन अवधि में चुकाए जाने वाले कुल ब्याज को भी ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि लंबी अवधि में यही रकम आपकी जेब पर बड़ा असर डाल सकती है।

 

Check Also

Jio Platforms IPO खुलते ही बड़े निवेशकों की दौड़, महज 28 मिनट में QIB कैटेगरी फुल! रिटेल निवेशकों ने बनाई दूरी, जानें अब तक कितना मिला सब्सक्रिप्शन

नेशनल डेस्क: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आईपीओ ने खुलते ही …