
नेशनल डेस्क: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में जारी छात्रों के आंदोलन का खुलकर समर्थन करने का फैसला किया है। उनके करीबी सहयोगियों के अनुसार, अन्ना हजारे जल्द ही अहिल्यानगर पहुंचेंगे और आंदोलन में शामिल होकर छात्रों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वह छात्रों की मांगों और उनसे जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
इससे पहले अन्ना हजारे ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि किसी मंत्री के इस्तीफे से सरकार कमजोर नहीं होती, बल्कि जवाबदेही और मजबूत होती है।
पीएम को लिखे पत्र में जवाबदेही पर दिया जोर
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में कहा कि किसी भी घोटाले या गड़बड़ी के लिए केवल निचले स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब सरकार उपलब्धियों का श्रेय लेती है तो शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को विफलताओं की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए। उनके अनुसार, मंत्री से इस्तीफा लेने का कदम पूरे शासन तंत्र में जवाबदेही का स्पष्ट संदेश देगा।
22 लाख छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता
गांधीवादी नेता ने कहा कि वर्ष 2024 के बाद इस साल भी 22 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि धांधली और निराशा के चलते 22 छात्रों ने आत्महत्या की, जो बेहद दुखद है। अन्ना हजारे ने कहा कि छात्र और अभिभावक पिछले 25 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, ऐसे में इसे केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानकर पुलिस बल का इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
सोनम वांगचुक को हटाने की कार्रवाई का भी किया विरोध
अन्ना हजारे ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बिना किसी सार्थक बातचीत के अनशन स्थल से हटाए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया। वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होने या संसद में इस मुद्दे पर आश्वासन मिलने तक उनका अनशन जारी रहेगा।
सरकार से संवाद की अपील
अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री से अपील की कि जनता की आवाज को राजनीतिक विरोधियों की आवाज न माना जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को गांधीवादी सिद्धांतों और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करते हुए प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुननी चाहिए। उनका कहना था कि 20 जून से शुरू हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को दबाने के बजाय सरकार को छात्रों के साथ भरोसेमंद और रचनात्मक संवाद स्थापित करना चाहिए।
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