
धर्म डेस्क : सनातन परंपरा में पूजा-पाठ के दौरान भगवान को भोग अर्पित करने का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक अर्पित किया गया भोग ईश्वर तक भक्त की भावनाओं को पहुंचाता है। पूजा में दीप, धूप, आरती और भोग को महत्वपूर्ण अंग माना गया है। भोग अर्पित करने के बाद वही प्रसाद बनकर भक्तों के बीच वितरित किया जाता है। ऐसे में भोग लगाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है।
भोग लगाते समय करें इस मंत्र का जाप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को भोग अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करना शुभ माना जाता है—
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये।
गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर।।
मान्यता है कि इस मंत्र के माध्यम से भक्त भगवान से प्रसाद स्वीकार करने और अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करता है।
सात्विक और शुद्ध होना चाहिए भोग
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार भगवान के लिए तैयार किया गया भोजन पूरी तरह सात्विक, स्वच्छ और श्रद्धा से बनाया जाना चाहिए। माना जाता है कि जिस देवी-देवता की पूजा की जा रही हो, उन्हें प्रिय वस्तुओं का भोग लगाने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
भोग के लिए किन बर्तनों का करें इस्तेमाल
धार्मिक परंपराओं में भोग अर्पित करने के लिए सोना, चांदी, तांबा और पीतल के बर्तनों को शुभ माना गया है। इसके अलावा मिट्टी या लकड़ी के पात्रों का भी उपयोग किया जा सकता है।
वहीं एल्यूमीनियम, लोहे, स्टील और प्लास्टिक के बर्तनों में भोग अर्पित करने से बचने की सलाह दी जाती है।
तुलसी के बिना अधूरा माना जाता है भोग
वैष्णव परंपराओं में मान्यता है कि भगवान विष्णु और उनके स्वरूपों को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी दल अवश्य होना चाहिए। इसलिए भोग की थाली में तुलसी का एक पत्ता रखना शुभ माना जाता है।
ऐसे करें भोग अर्पित करने की प्रक्रिया
भोग की थाली या कटोरी भगवान की प्रतिमा या तस्वीर के सामने रखें। इसके बाद हाथ में जल लेकर थाली के चारों ओर घुमाएं और जल छोड़ दें। फिर कुछ समय के लिए भोग भगवान के समक्ष रखा रहने दें।
मान्यता है कि लगभग 5 से 10 मिनट तक भोग अर्पित रखने के बाद भक्त को आंखें बंद कर भगवान को मानसिक रूप से भोजन ग्रहण कराने का भाव करना चाहिए। इसके बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।
भोग लगाते समय रखें इन बातों का विशेष ध्यान
भोग बनाते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। भोजन में सात्विक सामग्री का उपयोग करें और भगवान के प्रति श्रद्धा भाव बनाए रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुद्ध मन और सच्ची भक्ति से अर्पित किया गया भोग ही सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
Navyug Samachar