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अधिक मास का आखिरी शुक्र प्रदोष आज, शाम को कर लें ये आसान उपाय; मान्यता है कि बरसेगी शिव कृपा

धर्म डेस्क: अधिक मास का अंतिम शुक्र प्रदोष व्रत आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। कहा जाता है कि प्रदोष काल में की गई पूजा और उपासना से महादेव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

शास्त्रों में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन कुछ सरल उपाय करने से जीवन की बाधाएं दूर हो सकती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

शाम के समय करें शिवलिंग का अभिषेक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धापूर्वक किए गए अभिषेक से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की इच्छाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद देते हैं।

शिव चालीसा और व्रत कथा का करें पाठ

प्रदोष व्रत के दिन शिव चालीसा तथा प्रदोष व्रत कथा का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

घी का दीपक जलाना माना जाता है शुभ

धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

108 बार करें इस मंत्र का जाप

प्रदोष काल में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस मंत्र के जप से मानसिक शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

प्रदोष व्रत में इन बातों का रखें विशेष ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा में हल्दी अर्पित नहीं की जाती। इसके स्थान पर बेलपत्र, गंगाजल, दूध, चंदन, भस्म और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है।

इसके अलावा व्रत और पूजा के दौरान सात्विकता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशीले पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है।

आस्था और श्रद्धा से जुड़ी हैं मान्यताएं

धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में वर्णित मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। श्रद्धा, नियम और विधि-विधान के साथ की गई पूजा को अत्यंत फलदायी बताया गया है।

 

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