
धर्म डेस्क: सावन महीने में मनाया जाने वाला सुहागिन महिलाओं का प्रमुख पर्व हरियाली तीज वर्ष 2026 में 15 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित माना जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन, अखंड सौभाग्य तथा परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
हरियाली तीज 2026 की सही तिथि
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सावन मास का शुभ आरंभ 30 जुलाई से होगा। इसी पवित्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता पार्वती की वर्षों की कठोर तपस्या पूर्ण हुई थी और उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए थे। इसी वजह से इस पर्व को दांपत्य सुख और सौभाग्य का विशेष त्योहार माना जाता है।
हरियाली तीज की तैयारी और परंपराएं
हरियाली तीज से एक दिन पहले महिलाएं सात्विक भोजन करती हैं और व्रत की तैयारी शुरू करती हैं। इस अवसर पर हाथों में मेहंदी लगाना, सोलह श्रृंगार करना और नए वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास का भी प्रतीक माना जाता है।
हरियाली तीज की पूजा विधि
व्रत वाले दिन महिलाएं सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। परंपरा के अनुसार इस दिन काले, स्लेटी और बैंगनी रंग के वस्त्र पहनने से बचने की मान्यता है।
इसके बाद महिलाएं सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम के समय पूजा स्थल पर चौकी सजाकर उस पर लाल वस्त्र बिछाया जाता है और भगवान शिव एवं माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। यदि मिट्टी की प्रतिमा उपलब्ध न हो तो शिव-पार्वती की संयुक्त प्रतिमा की पूजा भी की जा सकती है।
पूजा के दौरान माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। भगवान शिव को बेलपत्र, फल, फूल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद हरियाली तीज व्रत कथा सुनी जाती है, आरती की जाती है और पूजा संपन्न की जाती है। व्रत का पारण अगले दिन सुबह किया जाता है।
हरियाली तीज को क्यों कहा जाता है ‘हरियाली’ तीज
हरियाली तीज का संबंध सावन की हरियाली और वर्षा ऋतु की सुंदरता से जुड़ा हुआ है। सावन में जब चारों ओर हरियाली फैल जाती है, उसी समय यह पर्व मनाया जाता है। इसी कारण हरे रंग को इस दिन शुभता, समृद्धि और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर महिलाएं हरे रंग की साड़ी या परिधान पहनती हैं, हरी चूड़ियां धारण करती हैं और हाथों में मेहंदी सजाती हैं। मान्यता है कि यह परंपरा वैवाहिक सुख, सौभाग्य और परिवार की समृद्धि का प्रतीक है।
हरियाली तीज से जुड़ी खास मान्यताएं
हरियाली तीज के दिन महिलाएं श्रद्धापूर्वक व्रत रखती हैं। कई महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं, जबकि कुछ फलाहार के साथ व्रत का पालन करती हैं। पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की आराधना की जाती है।
इस दिन सुहाग की सामग्री अर्पित करने, तीज व्रत कथा सुनने और आरती करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज प्रेम, विश्वास, समर्पण और अखंड सौभाग्य का पवित्र पर्व माना जाता है।
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