Monday , 5 October 2026

भारतीय रेलवे की नई पहल! ट्रेन की छत पर लगे सोलर पैनल, हर साल बनेगी 13,400 यूनिट बिजली; लाखों की होगी बचत

नेशनल डेस्क: भारतीय रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी लगातार नए कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में उत्तर मध्य रेलवे ने सौर ऊर्जा से संचालित एक विशेष यात्री कोच तैयार किया है। इस कोच की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनकी मदद से हर वर्ष हजारों यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा। फिलहाल इस परियोजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है।

21 सोलर पैनलों से बनेगी 13,400 यूनिट बिजली
प्रयागराज मंडल ने हाल ही में इस सोलर-असिस्टेड यात्री कोच को लॉन्च किया है। कोच की छत पर 6.93 किलोवाट क्षमता के 21 सोलर पैनल लगाए गए हैं। रेलवे के अनुसार, इन पैनलों से हर साल लगभग 13,400 यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा। इस बिजली का उपयोग कोच में लगे पंखे, लाइट और अन्य आवश्यक उपकरणों को संचालित करने में किया जाएगा।

हर साल 2.80 लाख रुपये की होगी बचत
रेलवे का अनुमान है कि एक सोलर कोच से प्रतिवर्ष लगभग 2.80 लाख रुपये की बिजली लागत बचाई जा सकेगी। इसके साथ ही यह तकनीक हर साल करीब 11 टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद करेगी। इससे रेलवे को आर्थिक लाभ मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

बैटरी बैंक में होगी बिजली की स्टोरेज
उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि सोलर पैनलों पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी से उत्पन्न बिजली पहले बैटरी बैंक में संग्रहित की जाती है। बाद में इसी संग्रहित ऊर्जा का उपयोग कोच के भीतर लगे पंखों, लाइटों और अन्य विद्युत उपकरणों को चलाने में किया जाता है। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।

हर महीने तैयार होंगे दो सोलर कोच
मुख्य अभियंता पुलकित श्रीवास्तव ने बताया कि इस परियोजना में अधिकांश कार्य रेलवे के अपने संसाधनों से किया गया है। सोलर पैनलों को सीधे कोच की छत पर लगाया गया है, जिससे अलग ढांचा तैयार करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उन्होंने बताया कि झांसी स्थित रेलवे की दोनों प्रमुख वर्कशॉप अब प्रत्येक महीने दो सोलर कोच तैयार करेंगी। तैयार होने के बाद इन्हें चरणबद्ध तरीके से विभिन्न ट्रेनों में शामिल किया जाएगा।

सफल रहा प्रयोग तो कई ट्रेनों में दिखेंगे सोलर कोच
रेलवे का मानना है कि यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देशभर की कई ट्रेनों में सोलर पैनलों से लैस कोच लगाए जा सकते हैं। इससे बिजली की खपत कम होगी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में रेलवे का योगदान और मजबूत होगा।

 

Check Also

Gold Silver Price: सोना खरीदने से पहले चेक करें आज का भाव, 5 अक्टूबर को दिल्ली-लखनऊ समेत बड़े शहरों में ये रहे रेट

बिजनेस डेस्क: सोने-चांदी की खरीदारी करने वालों के लिए नए सप्ताह की शुरुआत बाजार के …