
पश्चिम बंगाल डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को लेकर बड़ा सियासी दावा सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा है कि टीएमसी से अलग हुए कई नेता दोबारा पार्टी में लौटने की तैयारी में हैं। उन्होंने दावा किया कि 6 बागी सांसद और 50 फीसदी से ज्यादा विधायक ममता बनर्जी के संपर्क में हैं।
कुणाल घोष के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि उन्होंने किसी भी बागी नेता का नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि नेताओं की वापसी को लेकर बातचीत चल रही है और जल्द ही स्थिति साफ हो सकती है।
कुणाल घोष का दावा- नाम बताने से राजनीतिक नुकसान होगा
कुणाल घोष ने कहा कि कई बागी नेता टीएमसी में वापस आने के इच्छुक हैं। उन्होंने दावा किया कि 6 सांसद और 50 फीसदी से ज्यादा विधायक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के संपर्क में हैं।
उन्होंने कहा कि नेताओं के नाम और उनकी संख्या सार्वजनिक करने से राजनीतिक नुकसान हो सकता है। इसलिए फिलहाल इस बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की जा सकती।
यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी विधानसभा चुनाव में हार के बाद अंदरूनी संकट का सामना कर रही है।
बागी नेताओं पर दबाव बनाने का लगाया आरोप
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि कई नेता पार्टी में वापसी करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियों के दबाव की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर एक दिन के लिए भी पुलिस का दबाव खत्म हो जाए तो 24 घंटे के भीतर 56 से 58 विधायक टीएमसी के साथ खड़े दिखाई देंगे। उन्होंने जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर बीजेपी पर भी निशाना साधा।
चुनाव हार के बाद टीएमसी में बढ़ी थी अंदरूनी कलह
2026 विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़ा विभाजन देखने को मिला था। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में कई विधायक पार्टी से अलग हो गए थे। बाद में इस गुट को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की मान्यता भी मिल गई।
इसके अलावा टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों के पार्टी छोड़कर एनडीए समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने का दावा किया गया था। इससे ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा।
पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी है विवाद
टीएमसी के दोनों गुटों के बीच अब केवल राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई नहीं रह गई है। पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न, संगठन और संपत्ति पर भी दावा किया जा रहा है।
यह मामला चुनाव आयोग के सामने लंबित है और दोनों पक्ष अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
चंद्र कुमार बोस के इस्तीफे से भी बढ़ी मुश्किलें
इसी बीच नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। वह 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए थे।
उनके इस्तीफे को भी पार्टी के लिए एक और झटका माना जा रहा है।
बंगाल की सियासत में आगे क्या होगा
कुणाल घोष के इस दावे के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या टीएमसी में वास्तव में बड़ी वापसी होने वाली है या यह पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की रणनीति है।
फिलहाल बागी नेताओं की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं बीजेपी की तरफ से भी कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। लेकिन कुणाल घोष के बयान ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
Navyug Samachar