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Property Buying Guide: प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन दस्तावेजों की जरूर करें जांच, एक भी कागज गायब मिला तो पड़ सकता है भारी नुकसान

बिजनेस डेस्क: घर, फ्लैट या जमीन खरीदना अधिकांश लोगों के लिए जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है। ऐसे में केवल अच्छी लोकेशन, कम कीमत या बेहतर सुविधाओं को देखकर फैसला करना भविष्य में महंगा साबित हो सकता है। किसी भी प्रॉपर्टी का सौदा तय करने या एडवांस भुगतान करने से पहले उससे जुड़े कानूनी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर खरीदार को आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी विवादों और धोखाधड़ी का भी सामना करना पड़ सकता है।

सबसे पहले जांचें मालिकाना हक

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले टाइटल डीड या सेल डीड की जांच करना सबसे जरूरी कदम है। यह दस्तावेज बताता है कि संपत्ति का वास्तविक मालिक कौन है और उसे बेचने का कानूनी अधिकार है या नहीं। खरीदार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि विक्रेता के पास मूल दस्तावेज मौजूद हों और वे विधिवत पंजीकृत हों।

प्रॉपर्टी का पूरा इतिहास जरूर देखें

मदर डीड के जरिए किसी प्रॉपर्टी का पूरा स्वामित्व इतिहास पता लगाया जा सकता है। इससे यह जानकारी मिलती है कि वर्षों के दौरान संपत्ति किन-किन लोगों के नाम रही और वर्तमान मालिक तक कैसे पहुंची। विशेषज्ञों के अनुसार, कम से कम पिछले 30 वर्षों का स्वामित्व रिकॉर्ड जांचना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई अन्य व्यक्ति मालिकाना दावा न कर सके।

यह भी पता करें कि प्रॉपर्टी पर कोई कर्ज तो नहीं

एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट (ईसी) यह बताता है कि संबंधित प्रॉपर्टी पर किसी बैंक का ऋण या कोई अन्य कानूनी देनदारी है या नहीं। यदि संपत्ति पूरी तरह ऋणमुक्त है, तो ‘निल ईसी’ जारी किया जाता है। यह दस्तावेज खरीद से पहले अवश्य जांचना चाहिए।

जमीन के उपयोग की वैधता भी करें सुनिश्चित

यदि आप प्लॉट या जमीन खरीद रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उसका उपयोग किस श्रेणी में आता है। कृषि भूमि का आवासीय या औद्योगिक उपयोग करने के लिए कन्वर्जन सर्टिफिकेट आवश्यक होता है। इसके बिना किए गए निर्माण पर भविष्य में कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

नए फ्लैट में इन प्रमाणपत्रों की अनदेखी न करें

यदि किसी नए फ्लैट या बिल्डर परियोजना में निवेश कर रहे हैं, तो केवल पजेशन सर्टिफिकेट पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) यह प्रमाणित करता है कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार पूरा हुआ है। वहीं ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) यह सुनिश्चित करता है कि इमारत रहने के लिए सुरक्षित है और कानूनी रूप से उपयोग के योग्य है।

 

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