
धर्म डेस्क: 12 जुलाई 2026, रविवार को रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। रवि प्रदोष होने के कारण इस दिन भगवान शिव के साथ सूर्य देव की उपासना का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पितृ दोष से मुक्ति, सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
जानें प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 12 जुलाई को सुबह 2 बजकर 4 मिनट पर होगा, जबकि इसका समापन उसी दिन रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगा।
भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त 12 जुलाई को शाम 7 बजकर 20 मिनट से रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। धार्मिक दृष्टि से इस समय की गई शिव आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है।
ऐसे करें रवि प्रदोष व्रत की पूजा
रविवार सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल, जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। अंत में शुद्ध जल से जलाभिषेक करें।
इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद पुष्प, चंदन, धतूरा, आक का फूल और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान घी का दीपक और धूप जलाएं। भगवान शिव के समक्ष ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र और रुद्राष्टकम का पाठ कर आरती करें।
पूजा के दौरान इन मंत्रों का करें जाप
भगवान शिव की पूजा में इन मंत्रों का जाप शुभ माना गया है।
- ॐ नमः शिवाय
- ॐ नमो भगवते रुद्राय॥
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
शिव चालीसा और अन्य स्तोत्रों का भी करें पाठ
रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र और रुद्राष्टकम का श्रद्धापूर्वक पाठ करना भी शुभ माना गया है।
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