
धर्म डेस्क: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास में श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा, व्रत और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी महीने में लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा कर पवित्र नदियों से जल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखने के साथ व्रत कथा का पाठ करने की भी परंपरा है।
सावन सोमवार व्रत कथा
धार्मिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक धनी साहूकार रहता था, जिसकी कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति की इच्छा से वह प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करता था। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उस पुत्र की आयु केवल 16 वर्ष होगी।
समय बीतने पर साहूकार के घर पुत्र का जन्म हुआ। जब वह 16 वर्ष का हुआ तो उसका मामा उसे शिक्षा के लिए काशी लेकर गया। यात्रा के दौरान एक नगर में उसका विवाह एक राजकुमारी से हुआ। विवाह के बाद जब उसकी निर्धारित आयु पूरी हुई तो वह अचानक मृत अवस्था में गिर पड़ा।
उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती वहां से गुजर रहे थे। राजकुमारी के विलाप को सुनकर माता पार्वती ने भगवान शिव से उस युवक को जीवनदान देने का आग्रह किया। माता पार्वती की प्रार्थना स्वीकार करते हुए भगवान शिव ने उस युवक को पुनर्जीवित कर दिया। इसके बाद वह अपने परिवार के साथ सकुशल घर लौट आया। धार्मिक मान्यता है कि तभी से सावन सोमवार व्रत और इसकी कथा का विशेष महत्व माना जाने लगा।
सावन सोमवार की पूजा विधि
सावन सोमवार के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव के समक्ष व्रत एवं पूजा का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल, फिर कच्चा दूध और अंत में शुद्ध जल अर्पित करें। शिवलिंग पर सफेद चंदन का तिलक लगाकर अक्षत चढ़ाएं।
पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और मदार के फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर फल या मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए आरती करें और भगवान शिव से अपनी भूलों के लिए क्षमा याचना करें।
सावन में कांवड़ यात्रा का महत्व
सावन माह में कांवड़ यात्रा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हैं और अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया जलाभिषेक भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनता है।
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