
मध्य प्रदेश डेस्क: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी चयन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर चक्का जाम कर दिया गया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस पर पथराव हुआ, जिसमें पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए बड़े पैमाने पर इस्तीफों की चेतावनी भी दी है।
भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया है। लंबे समय से यह चर्चा थी कि पार्टी एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जताएगी, लेकिन प्रत्याशी की घोषणा के बाद समर्थकों में नाराजगी फैल गई। इसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ और बड़ी संख्या में समर्थक सड़कों पर उतर आए।
टिकट की घोषणा के बाद सड़क पर उतरे समर्थक
दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस प्रत्याशी को सजा होने के बाद रिक्त हुई थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। प्रत्याशी की घोषणा के बाद हजारों समर्थक राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर पहुंच गए और सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट देने की मांग करते हुए पार्टी के खिलाफ नारेबाजी की। लंबे जाम के कारण हजारों वाहन घंटों तक फंसे रहे और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जाम हटाने पहुंची पुलिस पर हुआ पथराव
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने हाईवे से जाम हटाने की कोशिश की। इसी दौरान भीड़ ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। दतिया के जिलाधिकारी स्वप्निल वानखेड़े के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग करीब 12 घंटे तक बाधित रहा, जिससे बसों और एंबुलेंस सहित कई वाहन फंस गए थे। उन्होंने बताया कि पुलिस के पहुंचते ही प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस दौरान लाठीचार्ज नहीं किया गया और प्रदर्शनकारियों पर किसी अन्य प्रकार का बल प्रयोग भी नहीं किया गया।
एसपी, एएसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल
पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब छह बजे से तीन हजार से अधिक लोग शहर में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने बाजार बंद कराए और राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 15 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इसका असर आसपास के जिलों की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा।
उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से कई बार समझाइश देने के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने। शनिवार तड़के करीब चार बजे हालात और बिगड़ गए तथा पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन पथराव और तेज हो गया। इस घटना में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद पुलिस ने दोबारा आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कार्रवाई करते हुए भीड़ को मौके से हटाया। कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है।
समर्थकों ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व को 24 घंटे का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर टिकट को लेकर निर्णय नहीं बदला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। समर्थकों ने साफ कहा कि जब तक पार्टी अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक विरोध जारी रहेगा।
जिला अध्यक्ष ने भी सौंपा इस्तीफा
टिकट वितरण से नाराज नेताओं में दतिया के जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा भी शामिल हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को इस्तीफा भेज दिया है।
अपने पत्र में रघुवीर कुशवाहा ने स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया तो जिला अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत अध्यक्ष, दतिया विधानसभा के छह मंडल अध्यक्ष और विधानसभा के 291 बूथों के सभी पदाधिकारी अपने पदों के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे।
कौन हैं नरोत्तम मिश्रा?
नरोत्तम मिश्रा दतिया विधानसभा सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं और मध्य प्रदेश सरकार में गृह मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा था। अब दतिया उपचुनाव में भी पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद समर्थकों का विरोध खुलकर सामने आ गया है।
बीजेपी के अगले फैसले पर टिकी निगाहें
दतिया उपचुनाव में टिकट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रूप से अहम मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर समर्थकों का आंदोलन जारी है, वहीं दूसरी ओर संगठन के कई पदाधिकारी इस्तीफे की चेतावनी दे चुके हैं। ऐसे में अब सभी की नजर भारतीय जनता पार्टी के अगले कदम पर टिकी हुई है कि पार्टी अपने फैसले में कोई बदलाव करती है या मौजूदा उम्मीदवार के साथ ही चुनाव मैदान में उतरती है।
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