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योगिनी एकादशी 2026: 9 या 10 जुलाई—कब रखा जाएगा व्रत? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व पर बड़ा अपडेट

धर्म डेस्क: आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी, योगिनी एकादशी को लेकर इस बार तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। श्रद्धालु जानना चाहते हैं कि व्रत 9 जुलाई को रखा जाएगा या 10 जुलाई को। पंचांग के अनुसार स्थिति स्पष्ट है कि तिथि की शुरुआत 9 जुलाई की शाम से हो रही है, जबकि उदयातिथि के आधार पर व्रत 10 जुलाई को रखा जाएगा।

योगिनी एकादशी की तिथि को लेकर स्थिति साफ
इस वर्ष आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि की शुरुआत 9 जुलाई को शाम 7 बजकर 46 मिनट के आसपास होगी और इसका समापन 10 जुलाई को शाम 4 बजकर 52 मिनट के करीब होगा। हिंदू परंपरा में व्रत उदयातिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।

व्रत का पारण कब किया जाएगा
योगिनी एकादशी का पारण यानी व्रत खोलने का समय 11 जुलाई 2026 को सुबह 5 बजकर 49 मिनट से लेकर 8 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसी अवधि में व्रत का समापन करना शुभ माना गया है।

शुभ मुहूर्त और योग
इस दिन पूजा के लिए कई महत्वपूर्ण मुहूर्त भी बन रहे हैं।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:58 बजे तक
अमृत काल: सुबह 8:46 से 10:15 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:16 से 5:04 बजे तक
त्रिपुष्कर योग: 11 जुलाई सुबह 5:52 से 11:03 बजे तक

योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन से पापों का नाश होता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों में इसे अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

पूजा विधि का महत्व
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी पत्र, पंचामृत, फल और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। दिनभर उपवास रखकर रात्रि में भजन-कीर्तन और भगवान के नाम का स्मरण किया जाता है। अगले दिन विधिपूर्वक पारण किया जाता है।

योगिनी एकादशी का धार्मिक संदेश
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत मोह-माया से मुक्ति दिलाने वाला और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना गया है। इसे सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करने वाला व्रत भी कहा गया है।

 

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